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ग्वालियर: अल्पवर्षा से उत्पन्न स्थिति के कारण वन विभाग जंगलों में विचरण करने वाले वन्य प्राणियों की पानी की समस्या दूर करेगा। प्रधान मुख्य वन संरक्षक वीआर खरे ने इस मुद्दे पर प्रदेश के वन मंडलाधिकारियों से पानी के समाधान के प्रस्ताव मांगे हैं। इस पर 14 दिसम्बर को बैठक होने जा रही है।
प्रदेश में हर वर्ष हो रही कम वर्षा की वजह से संरक्षित वन क्षेत्रों में पानी की समस्या गहराने लगी है। कई जगह पानी के स्रोत सूख चुके हैं। पानी की तलाश में वन्य प्राणी कई बार सड़कों व गांवों में पहुंच जाते हैं, जिससे उनके साथ दुर्घटनाएं भी हो जाती हैं। कुछ समय पूर्व संरक्षित क्षेत्रों में रहने वाले वन्य प्राणियों के लिए पानी उपलब्ध कराने के प्रस्ताव मांगे गए थे।
पानी की समस्या सबसे ज्यादा ग्वालियर, दतिया, भिंड, मुरैना, श्योपुर, छतरपुर, टीकमगढ़, उत्तरी पन्ना, दक्षिण पन्ना, सतना, रीवा, पूर्व सीधी, पश्चिम सीधी, दमोह, उत्तरी व दक्षिण सागर के संरक्षित क्षेत्रों में है। प्रधान मुख्य वन संरक्षक खरे ने सभी डीएफओ से कहा है कि संरक्षित क्षेत्र के बारहमासी जलस्रोत को चिह्न्ति करें। जहां पर जल स्रोत नहीं है, वहां वैकल्पिक व्यवस्था के लिए संरचना निर्माण के प्रस्ताव 14 दिसम्बर को होने वाली बैठक में लाएं। सहायक वन संरक्षक बीपी उपाध्याय ने बताया कि सभी डीएफओ को पत्र भेजकर बैठक की सूचना दे दी गई है।