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हुडा में प्लाटों का फर्जीवाड़ा

पानीपत. चंद मिनटों के खेल में लाखों के वारे-न्यारे। प्लान भी इतना मजबूत कि गड़बड़ी का किसी को शक भी न हो। इन लोगों ने बंटी और बबली की तरह ताजमहल तो नहीं बेचा, लेकिन इंग्लैंड रह रहे एक परिवार का प्लाट फर्जी पावर आफ अटार्नी कराकर बेच दिया।

रेजीडेंट प्रूफ से जब प्लान की परत दर परत खुली तो पुलिस से लेकर हुडा के आला अफसर तक दंग रह गए। इस मामले में हुडा के स्वीपर स्वतंत्र कुमार, रिकार्ड कीपर रणबीर सिंह, प्रापर्टी डीलर सन्नी मुंजाल, प्रवीण व राजेश को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। मंगलवार को तीनों को कोर्ट में पेश कर जेल भेज दिया।

ऐसे बना प्लान
पुलिस की इकानोमिक ब्रांच के अनुसार प्लान के मास्टर माइंड तहसील कैंप निवासी प्रोपर्टी डीलर सन्नी मुंजाल ने विदेश में रह रहे लोगों के प्लाट बेचने की योजना बनाई। प्रवीण को अपने साथ मिलाया। दोनों ने मिलकर हुडा के स्वीपर स्वतंत्र कुमार निवासी घरौंडा व रिकार्ड कीपर रणबीर सिंह वासी खुबडू को साथ मिलाया। पहली डील में डेढ़ लाख के हिसाब से पांच प्लाटों का सौदा तय हुआ।

क्लाइमेक्स में बदला नाम
प्लान के क्लाइमेक्स में जब फर्जी पावर आफ अटार्नी का समय आया तो प्रवीण ने अपने बुआ के लड़के सोनीपत निवासी राजेश को शामिल कर लिया। वैसे तो राजेश जाति तौर पर जाट है, लेकिन उसने राजेश जिंदल के नाम पर पावर आफ अटार्नी करा ली। अपना पता भी जुलाना जींद का दिया। अटार्नी छत्तीसगढ़ के शक्ति सब-डिवीजन से करवाई गई।

साढ़े सत्रह लाख में बेचा
राजेश जिंदल ने पावर आफ अटार्नी के आधार पर रोहतक की सीमा अमृत व अनुपमा कथूरिया को प्लाट साढ़े सत्रह लाख में बेच दिया। आरोपियों की और भी प्लाट बेचने की योजना थी।

रिकार्ड रूम की बनाई नकली चाबी
स्वीपर स्वतंत्र कुमार ने पुलिस जांच में बताया कि सेक्टर 13-17 स्थित हुडा कार्यालय में रिकार्ड रूम की नकली चाबी बनाकर घोटाले को अंजाम दिया गया। ये प्लानिंग रिकार्ड कीपर ने मिलकर बनाई। पुलिस ने आरोपियों से जांच में पांच प्लाटों के फर्जी कागजात बरामद किए हैं।

ऐसे हुआ खुलासा
प्लाट के असली मालिक वेदप्रकाश व कमलेश अरोड़ा कुछ समय पहले माडल टाउन में रहते थे। दोनों यहां से इंग्लैंड शिफ्ट हो गए। हुडा के अधिकारियों ने प्लाट की बिक्री पर रेजीडेंट प्रूफ के लिए माडल टाउन में पत्र लिख दिया।

इंग्लैंड में रह रहे प्लाट मालिकों को जब पता चला कि उनका तो प्लाट ही बेच दिया गया है तो दोनों वापस आए और एसडीएम से संपर्क किया। पुलिस में मामला जाते ही परत दर परत खुलती गई।





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