भोपाल: उच्च शिक्षा विभाग के ऐसे सभी प्राध्यापक फिर से सहायक प्राध्यापक बना दिए जाएंगे जिन्हे रिफ्रेशर और ओरिएंटेशन कोर्स के बारे में गलत जानकारी के आधार पर पदोन्नति दी गई है। सरकार ने कड़े कदम उठाते हुए पिछली सभी पदोन्नतियों की सर्जरी शुरू कर दी है। फिलहाल सरकार की सूची में ऐसे 350 प्राध्यापकों के नाम हैं जिन पर पदावनति की गाज गिर सकती है। इस कार्रवाई के परिणाम भी आने शुरू हो गए हैं। हाल ही में दो प्राध्यापकों को सहायक प्राध्यापक बना दिया गया है। सरकार के इस कदम से उच्च शिक्षा विभाग के प्राध्यापकों में हडकंप मचा हुआ है।
उच्च शिक्षा विभाग में इस समय सैकड़ों प्राध्यापक गलत तरीके से पदोन्नति हासिल करके सरकार को करोड़ों रुपयों का नुकसान पहुंचा रहे हैं। विभाग ने इनको सजा देने के साथ नुकसान की वसूली करने का भी मन बना लिया है। ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई करने के लिए प्रदेश भर के सभी प्राध्यापकों के बारे में जानकारी भेजने के लिए प्राचार्यों को निर्देश दिए थे।
सभी कालेजों से प्राध्यापकों के द्वारा किए गए रिफ्रेशर व ओरिएंटेशन कोर्स के बारे में मिली जानकारी के बाद 350 प्राध्यापकों की पदोन्नतियों की जांच की जा रही है। विभाग इस जानकारी की विषयवार पड़ताल कर रहा है। जिन प्राध्यापकों ने नियमानुसार दो रिफ्रेशर कोर्स और दो ओरिएंटेशन कोर्स नहीं किए हैं, उनकी पदोन्नतियां और प्रवर श्रेणी वेतनमान निरस्त किए जाएंगे। यही नहीं पदोन्नति और वेतनमान मिलने की तारीख से अब तक उनके द्वारा ली गई अधिक राशि की वसूली भी की जाएगी। क्यों आई ऐसी नौबत दरअसल जुलाई में हुए विधानसभा सत्र में सैन्य विज्ञान विषय के प्राध्यापकों की पदोन्नति को लेकर सवाल उठाया गया था। तब तत्कालीन विभागीय मंत्री तुकोजीराव पंवार ने स्वीकार किया था कि कुछ लोगों ने गलत पदोन्नति ली है। तब उन्होने इस मामले की जांच करने और कार्रवाई करने के आदेश दिए थे। दो को बनाया सहायक प्राध्यापक हाल ही में सैन्य विज्ञान के दो प्राध्यापकों को पदावनत कर दिया गया है।
इस समय माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय में कुलसचिव के पद पर पदस्थ सैन्य विज्ञान के डा अनिल चौबे को 18 साल पहले1989 में मिले प्रवर श्रेणी वेतन मान और 1992 में मिली प्राध्यापक पद पर पदोन्नति को निरस्त कर दिया गया है। जांच में पाया गया कि श्रीे चौबे ने एक भी रिफ्रेशर कोर्स और ओरिएंटेशन कोर्स नहीं किए थे। इसी तरह मोतीलाल विज्ञान महाविद्यालय में पदस्थ डा अशोक गुप्ता को 1999 में दिए गए प्रवर श्रेणी वेतनमान और 2006 में दी गई पदोन्नति को निरस्त कर दिया गया है। श्री गुप्ता द्वारा किए गए रिफ्रेशर कोर्स को मापदंडों के अनुरूप नहीं पाया गया था। गौर तलब है कि पिछले साल प्राचार्य के पद तक पहुंच चुके प्राध्यापक एके जैन को इन्ही कारणों से बीस साल पीछे कर फिर से सहायक प्राध्यपक बना दिया गया था।
आदेशों में विसंगति..सरकार ने नियमों के खिलाफ जाने वालों के लिए सख्त कदम उठाना तो शुरू कर दिया है लेकिन अभी से आदेशों में विसंगतियां भी नजर आने लगी हैं। उक्त दोनो आदेशों में श्री चौबे के मामले में सहायक प्राध्यापक का वेतन तय करने के साथ ज्यादा ली गई राशि की वसूली किए जाने के भी साफ निर्देश दिए गए हैं जबकि एमवीएम के श्री गुप्ता के आदेश में सिर्फ सहा. प्रा. का वेतनमान तय करने को कहा गया है। इसमें वसूली संबंधी कोई निर्देश नहीं दिए गए हैं।