पानीपत.
टूटी कुर्सियां, पुअर पिक्चर क्वालिटी और घटिया साउंड के रूप में अपनी पहचान बनाते जा रहे शहर के पुराने सिनेमा हाल खुद को समय के साथ अपडेट करेंगे। और आधुनिक मल्टीप्लेक्सों को जवाब भी देंगे। नए साल में इस पर काम शुरू होने की संभावना है।
लगतार घाटे में चल रहे और ‘ए’ ग्रेड फिल्मों के लिए अपनी पहचान बना चुके सीमा थियेटर की दशा सबसे पहले सुधरेगी। हाल के मालिक संदीप पुनियानी ने इस बारे में बताया कि बदलते ट्रेंड के अनुसार कंप्टीशन करने के लिए वे मल्टीप्लेक्स टाइप सिनेमा बनाने पर विचार कर रहे हैं।
संभवत: नव वर्ष में वे हाल के सुधार का काम शुरू करेंगे। वहीं संगीत व किशोर थियेटर के संचालक पवन गर्ग कहते हैं कि शहर में छह-सात मल्टीप्लेक्स स्थापित होने के बाद वे अपने थियेटरों के लिए नई योजना बनाएंगे। सिनेमा थियेटरों को बचाने के लिए इसके अलावा कोई दूसरा उपाय नहीं है।
क्यों पड़ रही है आधुनिक बनाने की जरूरत
पहले केबल ने फिर सीडी ने सिनेमा थियेटरों को झटका दिया और अब रही-सही कसर माल कल्चर के आधुनिक सिनेमाहाल ने पूरी कर इन थियेटरों को जमीन पर ला दिया। घाटे में चल रहे शहर के सभी सिनेमा थियेटर बंद होने के कगार पर पहुंच चुके हैं।
राज्य सरकार द्वारा लगाया गया 30 फीसदी मनोरंजन टैक्स भरना भी इनके लिए मुश्किल हो रहा है। ऐसे हालात में संचालक अब इन थियेटरों को बंद करने या फिर इन्हें नए रूप में ढालने के लिए मजबूर हो गए हैं।
टिकट रेट भी औंधे मुंह गिरे
सिनेमा थियेटर दर्शकों के मोहताज हुए तो टिकट दर भी कम करनी पड़ गई। सीमा थियेटर की बात करें तो फिलहाल 15, 10 व 6 रुपए में मूवी का मजा लिया जा सकता है। नवल सिनेमा में टिकट रेट 20 व 15 रुपए हैं तो किशोर, संगीत व दर्पण थियेटर के रेट भी इन्हीं के आसपास हैं। इन थियेटरों में निचला तबका या फिर मजदूर वर्ग से संबंधित लोग ही फिल्म देखने पहुंचते हैं।
अपर मीडियम क्लास यानी मल्टीप्लेक्स एनसीआर रीजन में तेजी से बढ़ रहे माल कल्चर के सिनेमा घरों में हाई सोसाइटी के साथ-साथ उच्च मध्यम वर्गीय लोग भी पहुंच रहे हैं। टिकट बेशक 70 से 100 रुपए तक है। लेकिन वहां की सुविधाएं व बेहतर पिक्चर क्वालिटी के चलते लोगों का रुझान लगातार फन सिनेमा में बढ़ रहा है।