bhaskar Web English
HomeNewsMetrosBhopal Bhopal

इलाज में लापरवाही सेहत पर भारी

भोपाल: राजधानी के नेशनल पार्क में दो महीने में दो युवा बाघों की मौत से यह जाहिर हो गया है कि यहां वन्य प्राणियों देख-रेख में कही न कहीं गंभीर अनदेखी जरूर है। यह हाल तो वन विहार का है। पूरे प्रदेश पर नजर डालें तो हालत यह है कि प्रदेश के कुछ नेशनल पार्र्को में तो चिकित्सक और दक्ष स्टाफ तक नहीं है। एक भी नेशनल पार्क ऐसा नहीं है, जहां बेबस वनजीवों को उपचार के पुख्ता इंतजाम नसीब हों।

पिछले दिनों एक बाघ की मौत ने हमारे नेशनल पार्र्को में वन्यप्राणियों की सेहत के सूरते-हाल को उजागर करके रख दिया है। भास्कर की पड़ताल से पता चलता है कि केवल भोपाल ही नहंीं बल्कि मध्यप्रदेश के दूसरे नेशनल पार्र्को में भी गंभीर लापरवाहियों और अनदेखियों का आलम है। व्यवस्था की संवेदनहीनता का सबसे बड़ा नमूना तो यही है कि एक भी नेशनल पार्क में सीटी स्कैन, एक्स-रे, एंडोस्कोपी आदि की सुविधा नहीं है। नियमानुसार हर नेशनल पार्क में एक वन्य प्राणी चिकित्सक का होना जरूरी है, लेकिन हकीकत उल्टी है। प्रशिक्षित स्टाफ की कमी का रोना अब भी कायम है। वन्य प्राणी के बीमार या जख्मी होने की हालत में तत्काल उपचार मिल नहीं पाता, देरी से मिला इलाज उनकी अकाल मौत का कारण बन जाता है।

वन विहार की बदहालीराजधानी में होने के बावजूद वन विहार के भी यही हाल हैं। वन विहार प्रबंधन का कहना है कि वन्य प्राणियों का रोजाना एक्स-रे, सीटी स्कैन आदि कर पाना मुमकिन नहीं होता। वन विहार में जानवरों की रोजाना विजुअल पड़ताल की जाती है। समय-समय पर उनके फीकल सेंपल भी देखे जाते हैं, जबकि सचाई यह है कि वन विहार के बाशिंदों की सतत निगरानी और उनके असामान्य व्यवहार की निरंतर पड़ताल में गंभीर लापरवाही बरती गई। यही वजह है कि ईशू और गौतम के अंगों में संक्रमण का इलाज हालात बिगड़ने के काफी बाद शुरू किया जा सका। संचालक जेएस चौहान का कहना है कि वन विहार में जरूरत के हिसाब से आवश्यक बदलाव किए जा रहे हैं। दो बड़े बाड़ों को छोटा करने का काम पहले ही शुरू कर दिया गया है। उधर, गौतम की मौत के बाद वन विभाग द्वारा विदेशी विशेषज्ञों द्वारा सेवाएं लेने की बात अब तक आगे नहीं बढ़ पाई है।





अपने विचार यहां लिखें
नाम:
ईमेल आईडी:
भाषा चुनॆ
हिन्दी रॊमन‌ हिन्दी फॊनॆटिक English
विचार:
कोड: