News
Metros
Chandigarh Chandigarh नई दिल्ली. आपको डिब्बाबंद ‘रेडी टू इट’ सरसों का साग पसंद नहीं तो कोई बात नहीं, बहुत जल्द पंजाब के खेतों से निकला सरसों का जायकेदार साग रोजाना सुबह-सुबह आपके दरवाजे तक पहुंचेगा। पंजाब की सब्जियों को देश-विदेश में पहुंचाने की यह कवायद गुजरात के मिल्क को-ऑपरेटिव संगठनों की तर्ज पर होगी। इसके तहत जल्द ही राज्य में सब्जी उत्पादक किसानों के लिए को-ऑपरेटिव संगठनों का जाल बिछेगा।
पंजाब ने केंद्रीय सहकारी विकास निगम (एनसीडीसी) के सहयोग से यह योजना तैयार की है। इसके तहत ऐसे किसानों को फायदा पहुंचाने का मकसद है जो खेती से बमुश्किल अपना जीवन बसर कर पाते हैं।
पंजाब के को-ऑपरेटिव मंत्री कैप्टन कंवलजीत सिंह ने मंगलवार को एनसीडीसी के मैनेजिंग डायरेक्टर पी. उमाशंकर से इस सिलसिले में मुलाकात की है। कैप्टन सिंह ने भास्कर को बताया कि उन्होंने को-ऑपरेटिव संगठन बनाकर किसानों की आर्थिक स्थिति सुधारने के मसले पर बात की है।
उत्पादों की तरह सब्जियों को भी बेचने की योजना बनाई गई है। इसके लिए पंजाब जल्द ही मदर डेयरी की तरह एक संस्था बनाएगा, जो मार्कफेड, मिल्कफेड के साथ सब्जी उत्पादक को-ऑपरेटिव संगठनों को सुझाव से लेकर मार्केटिंग के फंडे तक बताएगा।
बिचौलियों से बचाने की तैयारी : कंवलजीत सिंह ने बताया कि राज्य में किए सर्वे से पता चला है कि खेत से सब्जी निकलकर जब बाजार पहुंचती है, तब तक उसकी कीमत में छह गुना इजाफा हो जाता है। किसानों को इसका लाभ नहीं मिलता है। सारा मुनाफा बिचौलियों के पास चला जाता है। सरकार चाहती है कि यह मुनाफा बिचौलियों के बजाय किसानों व उपभोक्ताओं में बंटे।
नोडल एजेंसी होगा एनसीडीसी : एनसीडीसी व पंजाब सरकार के बीच हुई बातचीत में यह तय हुआ है कि इस पूरी योजना के लिए नोडल एजेंसी का काम एनसीडीसी करेगा। इसके अलावा किसानों के को-ऑपरेटिव संगठनों को चलाने की रूपरेखा राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड तैयार करेगा। इस बोर्ड की चेयरमैन अमृता पटेल से अगले सप्ताह कैप्टन कंवलजीत सिंह की बातचीत होगी।