जयपुर. प्रदेश में शहरी क्षेत्रों सहित अब ग्रामीण इलाकों में स्थित औद्योगिक भूखंडों पर आवासीय कॉलोनियां, बहुमंजिला इमारतें, एन्कलेव, होटल और मैरिज गार्डन स्थापित किए जा सकेंगे। राज्य सरकार ने मंगलवार को एक आदेश जारी कर राजस्थान भू राजस्व (औद्योगिक प्रयोजनार्थ आवंटन) नियम, 1959 में संशोधन किया है। इससे पहले शहरी क्षेत्रों में ही ऐसा किया जा सकता था।
जानकार लोगों का कहना है कि राज्य सरकार के इस आदेश से प्रदेश में बड़े शहरों के आसपास के ग्रामीण इलाकों में औद्योगिक प्रयोजन के लिए ली गई जमीनों के भाव आसमान छूने लगेंगे। इनका कहना है कि प्रदेश के ग्रामीण व शहरी इलाकों के औद्योगिक क्षेत्रों में लंबे समय से खाली पड़े भूखंडों को भूमाफिया पहले ही खरीद चुके हैं। नए संशोधन से ऐसे लोगों की चांदी हो गई है।
संशोधन के बाद क्या होगा?
राजस्थान भू राजस्व नियम-1959 के नियम 14 में बदलाव किया गया है। औद्योगिक उद्देश्यों के लिए परिवर्तित भूमि को अब ग्रामीण क्षेत्रों में भी अन्य उद्देश्य में काम लिया जा सकता है।
खातेदारी बनाम सरकारी
किसी ने खातेदारी जमीन को औद्योगिक उद्देश्य के लिए परिवर्तित करा रखा है तो इसे गैर औद्योगिक काम में लेने के लिए कलेक्टर को आवेदन करना होगा। वह टैक्स भरकर भू उपयोग परिवर्तन करा सकता है। जमीन सरकारी हुई तो पहले जमीन सरेंडर करने के बाद नए सिरे से आवेदन करना होगा।
अनुपयोगी भूखंडों का उपयोग होगा
>> राजस्थान भू राजस्व (औद्योगिक प्रयोजनार्थ आवंटन) नियम, 1959 के नियम 14 में बदलाव के बाद निजी खातेदारी वाले भूखंडों को औद्योगिक के अलावा अन्य प्रयोजन में काम में लिया जा सकेगा, लेकिन सरकारी भूखंड सरेंडर करने होंगे।
ललित कोठारी, प्रमुख सचिव, राजस्व
गांवों में जमीन ही नहीं बचेगी
>> पिछले चार साल के दौरान शहरी क्षेत्रों में सरकार ने जिस तरीके से अपने चहेतों को भूमि का आवंटन किया है, यदि इसी तरह गांवों में होगा तो वहां विकास अवरुद्ध हो जाएगा और अच्छे मकसद के लिए जमीनें भी नहीं बचेंगी।
डॉ. चंद्रशेखर बैद, विधायक, कांग्रेस