जयपुर/धौलपुर.
भाजपा सांसद और मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के पुत्र दुष्यंत सिंह गोचर भूमि में खातेदारी लेने के बाद अब दलितों की जमीन पर जबरन कब्जा करने के आरोपों से घिर गए हैं। एक कोली परिवार ने भाजपा सांसद पर पुलिस और प्रशासन की मदद से उनकी 25 बीघा जमीन हथियाने का आरोप लगाया है। अफसरों से खौफजदा पीड़ित परिवार का कहना है कि मामले की जांच ऐसी एजेंसी से कराई जानी चाहिए, जिस पर दुष्यंत सिंह और मुख्यमंत्री का नियंत्रण न हो।
यह जमीन धौलपुर तहसील में मनिया के पास सुंदर नगर में है। कोली परिवार के वीरी सिंह का कहना है कि यह जमीन उसने 1991 में सांसद दुष्यंत के पिता और धौलपुर के राजा हेमंत सिंह से एक लाख 98 हजार रुपए में खरीदी थी। हेमंत सिंह ने उनके पक्ष में इस जमीन की रजिस्ट्री भी कराई थी। इसके बाद से वे इस पर खेती करते आ रहे हैं और उनका ही कब्जा है।
वर्ष 2003-04 में दुष्यंत सिंह ने पूरी जमीन पर पुलिस की मदद से कब्जा कर लिया। शिकायत करते हैं तो पुलिस और प्रशासन थाने में बंद करने की धमकी देते हैं। इधर, इस मामले में जब मुख्यमंत्री और दुष्यंत सिंह का पक्ष लेने का प्रयास किया गया तो वे बात करने को तैयार नहीं हुए। दुष्यंत फोन काटते रहे। विशेषाधिकारी धीरेन्द्र कमठान का कहना था कि उनकी तबीयत खराब है। इस मामले में धौलपुर स्थित उनके वकील अम्बरीश श्रीवास्तव से बात कर लें।
फसल पर भी जताया था अधिकार : इससे पहले दुष्यंत सिंह ने वीरी सिंह की 10 बीघा में खड़ी फसल पर अपना अधिकार जताया था। यहां तक कि उनकी संपत्ति की देखभाल करते आ रहे मुख्यमंत्री के विशेषाधिकारी धीरेन्द्र कमठान ने 1996-97 में उनके खिलाफ फसल चोरी का मुकदमा दर्ज कराया था।
अदालत ने इस जमीन पर कोली परिवार का ही अधिकार मानते हुए उन्हें फसल चोरी के आरोप से न केवल बरी किया, बल्कि फसल भी उन्हें ही दिलवा दी थी। वीरी सिंह का आरोप है कि सांसद ने अपने प्रभाव का इस्तेमाल करते हुए उनका बयनामा खारिज कराने की कोशिश की थी। यह मामला आज भी अदालत में विचाराधीन है, जिसमें सांसद कोई दस्तावेज पेश नहीं कर रहे हैं।
हेमंत सिंह पर कार्रवाई क्यों नहीं?
वीरी सिंह के भाई रामेश्वर कोली का कहना है कि यदि हेमंत सिंह ने बिना अधिकार के जमीन की रजिस्ट्री उनके पक्ष में कराई तो इसके लिए उन पर भी कार्रवाई होनी चाहिए थी। उनके खिलाफ भी मुकदमा दर्ज होता, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
असली मालिक कोई और ही था?
यह 25 बीघा जमीन खुशवंत सिंह की थी, जिन्होंने हेमंत सिंह को पावर ऑफ अटार्नी दे रखी थी। इसी के आधार पर ही हेमंत सिंह ने यह जमीन 1.98 लाख रुपए में कोली परिवार को बेच दी थी। पीड़ित पक्ष के वकील विनोद भार्गव के अनुसार कोली परिवार इस जमीन पर पहले से ही हेमंत सिंह के लिए खेती कर रहा था।
बाद में दुष्यंत सिंह ने खुद को हेमंत सिंह का पावर ऑफ अटार्नी होल्डर बताते हुए राजस्व अदालत में दावा किया कि हेमंत सिंह को यह जमीन बेचने का अधिकार नहीं था, क्योंकि उनकी पावर ऑफ अटार्नी खुशवंत सिंह ने खारिज कर दी थी।
राजस्व अदालत ने एकपक्षीय रूप से दुष्यंत सिंह के पक्ष में यह मामला डिक्री कर दिया था। पीड़ित पक्ष के वकील का कहना है कि खुशवंत सिंह अदालत में कभी हाजिर नहीं हुए और न ही पावर ऑफ अटार्नी खारिज करने का दुष्यंत सिंह ने कोई दस्तावेज अदालत में पेश किया। इस की अपील राजस्व अपील अधिकारी के यहां चल रही है।
दुष्यंत के वकील अम्बरीश श्रीवास्तव ने दिए भास्कर के सवालों के जवाब
‘हेमंत सिंह ने गलत बेची थी जमीन’
सवाल: सुंदर नगर में सांसद दुष्यंत सिंह ने दलितों की जमीन पर कब्जा कर रखा है?
जवाब: मामले को राजनीतिक कारणों से हवा दी जा रही है।
आरोप है कि सांसद ने पुलिस के बल पर कब्जा किया है?
वह तो दुष्यंत की पुश्तैनी जमीन है। उन्होंने तो अपनी पुश्तैनी जमीन ही ली है। कोली परिवार का बयनामा खारिज करवा दिया है।
कोली परिवार का कहना है कि उसने 1991 में यह जमीन दुष्यंत के पिता हेमंत सिंह से खरीदी थी?
हेमंत सिंह ने यह जमीन गलत बेची थी। पैतृक संपत्ति होने के नाते उन्हें यह भूमि बेचने का अधिकार नहीं था।
फिर दुष्यंत किस आधार पर इस जमीन पर अधिकार जता रहे हैं?
यह उनकी पैतृक संपत्ति है।
जमीन राजस्व रिकॉर्ड में खुशवंत सिंह के नाम है, फिर दुष्यंत सिंह की पैतृक संपत्ति कैसे हुई?
खुशवंत सिंह, हेमंत सिंह के मित्र थे। उन्होंने हेमंत सिंह को पावर ऑफ अटॉर्नी दी थी, जो बाद में निरस्त करके दुष्यंत सिंह के नाम कर दी थी। इसी बीच हेमंत सिंह ने जमीन को बेच दिया। इसी पावर ऑफ अटॉर्नी के आधार पर ही दुष्यंत सिंह जमीन पर अपना अधिकार जता रहे हैं।