कोलकाता. एसबीआई के एमडी टीएस भट्टाचार्य का कहना है कि भारत में ब्याज दरें अल्प से मध्यम अवधि में गिरने की संभावना नहीं है।
अमेरिका में ब्याज दरों में कमी के कारण भारतीय दरों के साथ अंतर बढ़ता जा रहा है। यह अंतर रिजर्व बैंक पर दबाव बढ़ा रहा है। ज्यादातर बैकिंग विशेषज्ञों की राय है कि रिजर्व बैंक ब्याज दरों में कोई कमी नहीं करेगा।
सीआईआई के फिनटेक-2007 में भट्टाचार्य ने कहा कि बड़ी परियोजनाओं के लिए लंबी अवधि के कर्ज की गति धीमी है। उनकी राय में कंपनियों व इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र में धन की मांग है। लंबी अवधि के संसाधनों की कमी सबसे बड़ी बाधा साबित हो रही है।
रिजर्व बैंक ने कुछ दिन पहले ही बैंकों को चेताया है कि उन्हें कम लागत के धन की तलाश करनी चाहिए। भट्टाचार्य भी मानते हैं कि धन की ऊंची लागत के कारण ब्याज दरों को नीचे लाना संभव नहीं हो पा रहा है। रुपए की मजबूती के कारण एनआरआई डिपाजिट की स्थिति बदल गई है, एनआरआई ने एफसीएनआरबी में धन लगाना कम कर दिया है, इससे धन जुटाना मुश्किल हो गया है।
भट्टाचार्य ने कहा कि कर्ज की मांग ज्यादा है, लेकिन आपूर्ति ठीक नहीं है। एसबीआई दो-तीन माह में राइट इश्यू ला रहा है। तब वह कर्ज बांटने के लिहाज से बेहतर स्थिति में होगा।