सम्पादकीय. वर्तमान सुरक्षा परिदृश्य के बारे में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार एमके नारायणन और सेना प्रमुख जनरल दीपक कपूर के ताजा बयान उन जटिल हालात का संकेत देते हैं जिनसे न केवल भारत बल्कि विश्व के कई दूसरे देशों के सुरक्षा तंत्र को दो-चार होना पड़ रहा है।
नारायणन ने भारतीय खुफिया एजेंसियों के पास उपलब्ध जानकारी के हवाले से इसी हफ्ते के शुरू में पश्चिम और खाड़ी देशों को आगाह किया था कि आतंकी उनके संवेदनशील औद्योगिक प्रतिष्ठानों और हाई-प्रोफाइल नेताओं को निशाना बना सकते हैं।
उन्होंने विदेशों में स्थित अपने दूतावासों को भी आतंकी हमलों के खिलाफ सचेत रहने की समझाइश दी है। अब जनरल कपूर ने चेताया है कि देश का सुरक्षा परिदृश्य बहुत उलझा हुआ, विविधतापूर्ण और नई-नई चुनौतियों से भरा हुआ है तथा सेना को अपने बहुत से संसाधन आतंकवाद और उग्रवाद की चुनौतियों से जूझने में खपाने पड़ रहे हैं। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार और सेना प्रमुख दोनों की चिंता की जरा सी अनदेखी देश के लिए भारी नुकसान का कारण बन सकती है।
दरअसल, 11 सितंबर 2001 को अमेरिका में हुए आतंकी हमले के बाद से दुनिया का एक बहुत बड़ा हिस्सा असुरक्षा और आशंका के माहौल का शिकार हो गया है। इनमें वे देश भी शामिल हैं जो कभी यह दावा करते नहीं अघाते थे कि उनकी सुरक्षा व्यवस्था में परिंदा भी सेंध नहीं लगा सकता है। इन हालात में लोगों में अविश्वास की भावना भी चरम पर पहुंची है। दूसरी ओर अमेरिका की अगुवाई में आतंकवाद के खात्मे के लिए जारी वैश्विक युद्ध के अपनी मंजिल तक पहुंचने के भी कोई आसार नहीं दिखाई दे रहे हैं।
भारत और उसके आसपास के प्राय: सभी देशों में तो स्थिति और भी विकट है। इन देशों में अलगाववादी और उग्रवादी तत्व जब-तब हिंसक वारदातों में करके सुरक्षा तंत्र को चुनौती देते रहते हैं। पाकिस्तान के अनिश्चिततापूर्ण राजनीतिक माहौल में वहां पूरी की पूरी पीढ़ी उग्रवाद की ओर झुक रही है और उसकी गतिविधियां क्षेत्र के सभी देशों के लिए गंभीर खतरा बनती जा रही हैं।
इन हालात में देश की खुफिया एजेंसियों तथा सेना व सुरक्षा बलों पर काम का बोझ बढ़ जाना स्वाभाविक है लेकिन शांति और सुरक्षा की सारी जिम्मेदारी उन्हीं पर छोड़कर निश्चित नहीं हुआ जा सकता है।
ऐसे में जरूरी है कि पूरा देश नारायणन और जनरल कपूर की चिंताओं को गंभीरता से समझे और हर कोई अपने आसपास होनेवाली संदिग्ध गतिविधियों पर कड़ी नजर रखे। सुरक्षा सलाहकार और सेना प्रमुख की चिंता जिस दिन हम सबकी चिंता का विषय बन जाएगी, उस दिन हमारा सुरक्षा परिदृश्य कहीं बेहतर होगा।