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किरोड़ी ने दी इस्तीफे की धमकी

जयपुर. खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री डॉ. किरोड़ीलाल मीणा ने अपनी ही सरकार पर गुर्जरों को सहयोग करने का आरोप लगाते हुए इस्तीफे की धमकी दी है। हालांकि मीणा ने इस पर कुछ भी कहने से इनकार कर दिया। वहीं, सरकार की तरफ से कहा गया है कि मीणा ने कोई त्यागपत्र नहीं दिया। वहीं वित्त राज्यमंत्री वीरेन्द्र मीणा ने सरकार छोड़कर समाज के साथ जाने की धमकी दी है।

विश्वस्त सूत्रों ने बताया कि डॉ. मीणा ने मुख्यमंत्री को एक पत्र भी लिखा है। पत्र में मीणा ने सरकार के रवैये पर गंभीर आरोप लगाए है। पत्र में कहा गया है कि गुर्जर समाज एसटी में शामिल होने के लिए पांच मापदंडों को पूरा नहीं करता है। यह केन्द्र का मामला है। राज्य सरकार को केन्द्र पर दबाव बनाना चाहिए। इस मामले में राज्य सरकार अब तक पूरी तरह नाकाम रही है। पत्र में कहा गया है कि गुर्जर द्वारा संवैधानिक मांग के लिए हिंसा का सहारा लिया गया।

सरकार हिंसा दबाने के बजाया उनके सामने झुकती रही। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद भी गुर्जरों ने बंद किया, रेल रोकी और जनजीवन अस्त-व्यस्त किया। अब सरकार ने उनके मुकदमें वापस ले रही है। यह अपराधियों को प्रश्रय देना है। मीणा ने कहा कि गुर्जरों ने सरकार पर भरोसा नहीं किया। उनके सहमति से चौपड़ा कमेटी बनी। इसके बावजूद संपत्तियों को नुकसान पहुंचाया गया लेकिन सरकार उदासीन बनी रही।

मीणा ने पत्र के अंत में कहा कि संविधान की रक्षा की शपथ ली है, उसमें जाति विशेष के लिए कोई स्थान नहीं है। लेकिन जाति विशेष के लोग आंदोलन के नाम पर हिंसा का तांडव करते रहे और हम चुप्पी साधे रहे। यह संभव नहीं है।

* मुझे इस मामले में फिलहाल प्रेस में कुछ नहीं कहना।
डॉ. किरोड़ीलाल मीणा खाद्य मंत्री

* वे सीएम से बात करेंगे। सीएम अगर मीणा समाज के खिलाफ जाएगी तो वे समाज के साथ जाएंगे।
वीरेन्द्र मीणा वित्त राज्य मंत्री

चौपड़ा कमेटी की रिपोर्ट आने के बाद मुख्यमंत्री इस पर विचार करेगी। कैबिनेट की बैठक भी बुलाई जा सकती है लेकिन रिपोर्ट आने से पहले कुछ नहीं कहा जा सकता। किरोड़ीलाला मीणा के त्यागपत्र जैसी कोई बात नहीं है।

मीणा भी कम नहीं
हमारी नहीं सुनी तो सरकार के खिलाफ मोर्चा जनजाति आरक्षण बचाओ संयुक्त संघर्ष समिति के प्रदेशाध्यक्ष रामनारायण नागवा ने बताया कि सरकार न तो गुर्जरों के पक्ष में रिपोर्ट भेजेगी और न ही हमारे आरक्षण से छेड़छाड़ करेगी। मुख्यमंत्री वसुंधराराजे ने हमारे लोगों को इस बात का भरोसा दिलाया है। इसके बावजूद हमारे खिलाफ रिपोर्ट जाती है तो आदिवासी समाज सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलेगा। इसके लिए 16 दिसंबर को आगरा रोड स्थित चंद्रमहल गार्डन में समाज के लोगों की मीटिंग बुलाई गई है। संयुक्त संघर्ष समिति के प्रदेश संयोजक श्रीनारायण कैमला ने बताया कि सत्ता में बैठे हमारे सांसद और विधायकों ने गुर्जरों के पक्ष में रिपोर्ट नहीं भेजे जाने का वादा कर रखा है। यदि इसके बाद भी गुर्जरों के पक्ष में रिपोर्ट जाती है तो पहले उनसे हिसाब मांगा जाएगा। इसके बाद समाज सरकार और वादा करने वाले जनप्रतिनिधियों का हिसाब करेगा।

रिपोर्ट दो सौ से ज्यादा पेजों की
चोपड़ा कमेटी की रिपोर्ट दो सौ पेजों से ज्यादा होने की संभावना है। खासाकोठी स्थित कमेटी कार्यालय में शुक्रवार शाम तक रिपोर्ट को अंतिम रूप देने का काम चल रहा था। गुर्जरों के शपथ-पत्रों को सार रूप में, सर्वे रिपोर्ट और कलेक्टरों की रिपोर्ट आदि को एनेक्चर के रूप में लगाया जाएगा। कमेटी ने 147 गांवों का दौरा किया है। 2000 लोगों की सुनवाई की और 14,632 प्रतिवेदन तथा 35 हजार शपथ-पत्रों को देखा है।

कमेटी को आसाम, कर्नाटक, जम्मू-कश्मीर, दिल्ली और हरियाणा सहित देशभर से आए लोगों ने प्रतिवेदन दिए हैं।





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