भोपाल/लखनऊ: चंबल नदी में एक के बाद दर्जनों घड़ियालों की मौत की वजह उनके लिवर (यकृत) में खराबी बताई गई है। पोस्टमार्टम करने वाले डाक्टरों का कहना है कि इनके लिवर क्षतिग्रस्त मिले है। लिवर क्यों खराब हुआ इसके लिए इंडियन वेटनरी रिसर्च इंस्टीटयूट बरेली की रिपोर्ट का इंतजार है। इस घटना से दुनियाभर के घड़ियाल विशेषज्ञ चिंतित हैं। अब तक दो दर्जन घड़ियालों की मौत हो चुकी है। इनमें 17 के शव मिल चुके हैं।
घड़ियालों की मौत के कारण कुकरैल से भेजे जाने वाली पांच दर्जन घड़ियालों की खेप को फिलहाल रोक दी गई है। घड़ियालों की रहस्यमय मौत के बाद दिल्ली, कानपुर,आगरा, लखनऊ व बरेली के विशेषज्ञ कारण खोजने में लगे है।
उत्तरप्रदेश के प्रमुख वन संरक्षक वन्य जीव डीएनएस सुमन तथा मध्य प्रदेश के मुख्य वन संरक्षक पीवी गांगुली ने साझा कार्ययोजना बनाने के लिए विचार विमर्श किया है। कुछ विशेषज्ञ मौत की वजह यमुना नदी के प्रदूषण को जिम्मेदार मानते है। चंबल नदी यमुना से मिलती है। गौरतलब है कि चंबल नदी घड़ियालों का प्राकृतिक बसेरा है। ऐसा पहले कभी नहीं हुआ- मप्र में ये घड़ियाल करीब 435 किमी लंबी चंबल सेंक्चुरी में बरई के आसपास 30 किमी के इलाके में पाए गए हैं। नौ दिसंबर को यहां पहला घड़ियाल मिला था। तब से अब तक कुल 11 घड़ियाल मिले हैं। इनकी उम्र करीब दस साल बताई गई है।
वल्र्ड कंजर्वेशन यूनियन के सदस्य डॉ. आरजे राव इस इलाके का दौरा करने वाले हैं। उन्होंने भास्कर को बताया कि ऐसा पहले कभी नहीं हुआ। यह बुरी खबर पूरी दुनिया के घड़ियाल विशेषज्ञों तक गई है। जानकारों का कहना है कि अगर विभाग की निगरानी सतत् रही होती तो कुछ पहले इसका पता चल सकता था, क्योंकि मृत घड़ियालों के शव बहुत बुरी हालत में पाए गए। इसका अर्थ यह है कि इनकी मौत कुछ दिन पहले ही हुई होगी। गौरतलब है कि इतनी लंबी चंबल सेंक्चुरी के लिए वन विभाग का काफी कम स्टाफ है और पहले ही अवैध रेत खनन ने उनके अस्तित्व का संकट खड़ा किया हुआ था।
इनका कहना है..-तीस साल से चंबल सेंक्चुरी को देख रहा हूं। ऐसा पहली बार हुआ कि एक साथ घड़ियाल इतनी बड़ी संख्या में मारे गए हों। चंबल के इस हादसे से पूरी दुनिया के घड़ियाल विशेषज्ञ चिंतित हैं। सबकी निगाहें जांच रिपोर्ट पर हैं।
-डॉ.आरजे राव, सदस्य, वल्र्ड कंजर्वेशन यूनियन।