भोपाल: राज्य सरकार के विभागों द्वारा वित्तीय वर्ष 2006-07 में साढ़े तीन सौ करोड़ रु. की राशि का उपयोग नहीं करने के खुलासे के बाद सरकार में हड़कंप मचा है। भास्कर के 14 दिसंबर के अंक में महालेखाकार कार्यालय की जारी रिपोर्ट के आधार पर यह खुलासा किया था। विपक्ष ने इतनी बड़ी राशि का उपयोग नहीं किए जाने पर सरकार को आड़े हाथों लिया है। वित्तीय वर्ष 2006-07 में विभागों ने बजट में आवंटित राशि का उपयोग न करते हुए बाद में राशि का समर्पण किया था, जिससे वह राशि लैप्स हो गई। इस खुलासे के बाद वित्त विभाग ने व्यवस्था में बदलाव करते हुए बजट में विभागों को आवंटित होने वाली राशि की निगरानी कमिश्नर ट्रेजरी एकाउंट के साथ स्वयं भी करने का निर्णय लिया है।
वित्त विभाग ने सभी विभागों को पत्र लिखकर इस संबंध में निर्देश दिए हैं। इसमें विभागों को वित्तीय वर्ष 2007-08 में समर्पण एवं राशि के पुनर्वियोजन की जानकारी वित्त विभाग को 31 मार्च तक देने के लिए कहा गया है, जिससे उसे 15 अप्रैल तक मिलान के लिए महालेखाकार कार्यालय को भेजा जा सके।
सिर्फ घोषणाएं की जा रही हैं, उन पर अमल नहीं हो रहा है। इसलिए बड़ी संख्या में राशि लैप्स होगी ही। विकास कार्य रुके हुए हैं। कहीं कोई नया छात्रावास नहीं खोला गया है। शिक्षा की भी बदहाल स्थिति है। जमुना देवी, नेता प्रतिपक्ष प्रशासन पर मुख्यमंत्री और मंत्रियों की पकड़ नहीं है। इसलिए 350 करोड़ रुपए की राशि का उपयोग नहीं किया जा सका। मंत्रियों की अपने विभागों पर पकड़ होती तो इतनी बड़ी राशि लैप्स नहीं होती। इसका उपयोग विकास कार्यो में किया जा सकता था। मानक अग्रवाल, प्रवक्ता कांग्रेस अब तक वित्तीय वर्ष के दौरान राशि के समर्पण की निगरानी कमिश्नर ट्रेजरी एकाउंट के स्तर पर की जाती थी। इस व्यवस्था में बदलाव करते हुए अब यह काम स्वयं वित्त विभाग करेगा। जिससे विभाग बजट में आवंटित राशि का उपयोग कर सकें। अशोक दास, प्रमुख सचिव, वित्त