भोपाल: भारत के मुख्य न्यायाधीश केजी बालकृष्णन ने कहा कि आर्थिक उदारीकरण के दौर में जिस तरह से दुनिया बढ़ रही है, उसके अनुसार विधि संस्थानों को अपने स्नातकों को शिक्षा देना चाहिए। आर्थिक दौर में बाजार का विस्तार हो रहा है, इससे नई तरह की चुनौतियां भी कानून के सामने आ रही है। इससे निपटने के लिए भी उन्हें कानून का उच्च स्तर बनाए रखना चाहिए। श्री बालकृष्णन रविवार को राष्ट्रीय विधि संस्थान विश्वविद्यालय भोपाल में प्रथम दीक्षांत समारोह को संबोधित कर रहे थे। इस मौके पर मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के मुख्य न्यायधीश एके पटनायक समेत अन्य न्यायाधीश उपस्थित थे। भारत के मुख्य न्यायाधीश ने चार साल के मेधावी छात्रों को सिल्वर, गोल्ड मेडल और उपाधि प्रदान की।
उन्होंने दीक्षांत समारोह में जस्टिस जीपी सिंह को पीएचडी की उपाधि भी प्रदान की। श्री बालाकृष्णन ने विधि स्नातकों को दुनिया में विकसित हो रही नई तकनीक के अनुसार तैयार होने के लिए कहा। उन्होंने संस्थान के विधि स्नातकों का आह्वान करते हुए कहा कि वे गरीबों के लिए कानून की लड़ाई इस तरह लड़ें कि उनका कानून की प्रक्रिया पर विश्वास जम सके।
इससे पूर्व मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश एके पटनायक ने दीक्षांत समारोह की शुरुआत करने की अनुमति कार्यक्रम का संचालन कर रहे एनएलआईयू के डायरेक्टर बलराज चौहान को दी। बाद में श्री पटनायक के आदेशानुसार कार्यक्रम का समापन किया गया।
इनको मिली उपाधि कार्यक्रम में सबसे पहले जस्टिस केजी बालाकृष्णनन ने मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश जस्टिस जीपी सिंह को पीएचडी की उपाधि दी। बाद में मुख्य न्यायाधीश ने क्रमश: वर्ष 2003 के 25, वर्ष 2004 के 49, वर्ष 2005 के 67, वर्ष 2006 के 77 और 2007 में स्नातक हुए 74 स्टूडेंट को ला ग्रेजुएट की उपाधि दी।