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‘नागरिकों को संस्कारित करती है संस्कृत भाषा’

ग्वालियर: संस्कृत ही एक मात्र ऐसी भाषा है जो हमारे देश के नागरिकों को संस्कारित करती है। सभ्य सुसंस्कृत समाज के निर्माण के लिए संस्कृत ही सर्वाधिक उपयोगी भाषा है। उक्त विचार रामकृष्ण आश्रम के अध्यक्ष स्वामी स्वरूपानंद ने माधव कालेज में आयोजित संस्कृत शोध संगोष्ठी में व्यक्त किए।

स्वामी स्वरूपानंद ने कहा कि संस्कृति का संरक्षण एवं सभ्य समाज का निर्माण वर्तमान की आवश्यकता है। अध्यक्षीय उद्बोधन में डा.विजेन्द्र सिंह गुप्त ने कहा कि संस्कृत पारम्परिक एवं आधुनिक विषयों की प्रतिनिधि भाषा है। यह ज्ञान, विज्ञान, चिकित्सा व तंत्र जैसे अनेक विषयों पर हमारा मार्ग प्रशस्त करती है। विशिष्ट अतिथि दिवाकर विद्यालंकार ने कहा कि मनुष्य जीवन के लिए उपयोगी सभी विषयों का समावेश संस्कृत साहित्य में निहित है। संस्कृत भाषा वर्ग विशेष की अथवा कार्यविशेष की भाषा नहीं है।

काशीनाथ मोघे ने कहा कि संस्कृत भाषा को व्यवहार में लाने का कार्य महर्षि अरविन्द, रामकृष्ण, विवेकानंद जैसें संतों ने किया है। डा. बालकृष्ण शर्मा ने भी उद्बोधन दिया। अतिथियों का स्वागत प्राचार्य डा. चन्द्रकांत विष्ण मोघे ने किया। संचालन डा. गोविंद गंधे तथा आभार डा. रुकमणि तिवारी ने व्यक्त किया। इस अवसर पर मध्यभारत शिक्षा समिति के अध्यक्ष प्र.ना.केलकर, नरेन्द्र कुंटे विशेष रूप से उपस्थित थे।





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