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दबाव में सरकार

जयपुर. राजस्थान एक बार फिर बड़े जातीय आंदोलनों के मुहाने पर है। चोपड़ा कमेटी की रिपोर्ट का खुलासा होने से पहले से ही गुर्जर और मीणा समाज ने सरकार दबाव में सरकारपर दबाव बना दिया है। रिपोर्ट गुर्जरों के पक्ष में हो या विरुद्ध सरकार को दोनों ही स्थिति में किसी न किसी समाज का गुस्सा झेलना पड़ेगा। मीणा समाज के सरकार और पार्टी पदाधिकारियों ने इस्तीफे देकर अपना दबाव बनाया है जबकि गुर्जर समाज ने महापड़ाव की धमकी दी है। राज्य के खाद्य मंत्री किरोड़ी लाल मीणा ने रविवार को अपना इस्तीफा मुख्यमंत्री और प्रदेश भाजपा अध्यक्ष को सौंप दिया। इस्तीफा लेकर किरोडी की पत्नी सीएम हाउस गई थीं।

गुर्जर-मीणाओं की एक-दूसरे को चेतावनी
गुर्जर आंदोलन के अगवा रहे कर्नल किरोड़ी सिंह बैसला ने मीणाओं को हद में रहने की सलाह दी है। बैसला के इस बयान से ही जातीय संघर्ष की बू आती है। जवाब में मीणा समाज के नेताओं ने भी बैसला को अपनी हद में रहने की चेतावनी दे डाली है। गुर्जर आरक्षण आंदोलन संयुक्त संघर्ष समिति के संयोजक प्रहलाद गुंजल व कोर कमेटी के सदस्य विधायक अतरसिंह भडाना ने कहा कि या तो चिट्ठी जाएगी या फिर सरकार जाएगी। उन्होंने 21 जनवरी से जयपुर में महापड़ाव की चेतावनी भी दी।

दूध सैंपलिंग अभियान, गुर्जर भड़के
जयपुर, भरतपुर और अलवर में दूध सैंपल के लिए शुरू किए गए विशेष अभियान से गुर्जर भड़क गए हैं। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि अभियान सिंथेटिक दूध की शिकायतें मिलने के कारण शुरू किया गया है, जबकि गुर्जर नेताओं का कहना है कि समाज पर दबाव बनाने का यह सरकारी हथकंडा है। पर दबाव डालने के लिए का आरोप है कि यह दूध व्यवसाय से जुड़े गुर्जरों को परेशान करने के लिए उठाया गया कदम है।

एडिशनल डायरेक्ट हैल्थ बीआर मीणा का कहना है कि पिछले दिनों आई शिकायतों के बाद दूध के सैंपल का विशेष अभियान तीन जिलों में 18 दिसंबर तक चलाने का फैसला लिया गया है। मिलावट पाए जाने पर दोषी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। इधर गुर्जरों का कहना है कि अचानक शुरू किया गया यह अभियान गुर्जर दूधियों को परेशान करने के लिए उठाया गया कदम है। गुर्जर विधायक प्रहलाद गुंजल का कहना है कि यह गुर्जरों के खिलाफ साजिश का हिस्सा है। अभियान के बहाने गुर्जरों को परेशान करना बंद नहीं किया गया, तो प्रदेश में दूध की सप्लाई ठप्प कर दी जाएगी।

यो ल्यो साब रो इस्तीफो
जयपुर। खाद्य मंत्री किरोड़ीलाल मीणा ने पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने अपना इस्तीफा पत्नी गोलमा के हाथ सीएम हाउस भेजा।

सीन-1
स्थान : मुख्यमंत्री आवास, रात साढ़े आठ बजे।
मीडिया की भारी भीड़। मीणा समाज के लोग भी बड़ी संख्या में मौजूद।

भास्कर : आप क्यों आई हैं?
गोलमा : मेरे पति ने मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे दिया है। वही सौंपने आई हूं।

भास्कर : किरोड़ीलाल खुद क्यों नहीं आए?
गोलमा : वे बीमार हैं।

भास्कर : इस्तीफा क्यों दिया?
गोलमा : ये उनसे पूछिए।

सीन-2
करीब पौन घंटा बाद गोलमा बाहर आती हैं।

सवाल : क्या मुख्यमंत्री को इस्तीफा सौंप दिया?
गोलमा : मुख्यमंत्री तो आई नहीं। महेश शर्मा को इस्तीफा दे दिया। मुख्यमंत्री के नाम वाला इस्तीफा उनके सेकेट्ररी को दे दिया।

सीन-3
मुख्यमंत्री आवास पर भाजपाध्यक्ष महेश शर्मा से बात।

सवाल : क्या मीणा ने इस्तीफा दे दिया है?
महेश शर्मा : यह इस्तीफा नहीं है, पत्र है।

सवाल : पत्र में क्या लिखा है?
महेश शर्मा : मैं आपको कंटेट क्यों बताऊं?

सीन-4
झूठ बोलते हैं महेश शर्मा : गोलमा
रात साढ़े नौ बजे। किरोड़ीलाल मीणा का घर।सवाल : महेश शर्मा कह रहे हैं कि आपने इस्तीफा नहीं, साधारण पत्र सौंपा है। असलियत क्या है?
गोलमा : पत्र होता तो नौकर से भिजवा देती।

सवाल : हो सकता है कोई साधारण कागज हो।
गोलमा : इस्तीफा था इस्तीफा। जानती नहीं क्या?

सवाल : महेश शर्मा तो कह रहे हैं..
गोलमा : महेश शर्मा झूठ बोल रहे हैं। साफ झूठ।
(वहां मौजूद मीणा समाज के लोग नारा लगाते हैं : राबड़ी देवी जिंदाबाद, गोलमा देवी जिंदाबाद।)





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