रोपड़. यहां स्थित अंतरराष्ट्रीय वैटलैंड में आने वाले प्रवासी पक्षियों की संख्या घटने लगी है। पर्यावरण विशेषज्ञों की नजर में इसकी खास वजह थर्मल प्लांट से
लगातार सतलुज में फेंका जा रहा गर्म पानी है। थर्मल प्रशासन की नजर में यह मामला बहुत गंभीर नहीं है, पर पंजाब प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड को जब इस बारे में बताया गया तो उसने जांच करवाने को कहा। आसपास के लोगों का कहना है कि प्लांट से छोड़े जाने वाला यह पानी इतना गर्म है कि इसकी चपेट में आने वाले जीव जिंदा नहीं रह सकते।
यहां कई प्रकार के पक्षी अक्तूबर के अंत तक आना शुरू कर देते हैं और मार्च में लौट जाते हैं।
थर्मल से दरिया तक निकाली गई है छोटी नहर
प्लांट से गर्म पानी छोड़ने के लिए छोटी नहर निकाली गई है जोकि थर्मल के बायलरों को ठंडा करने के बाद बचे पानी को लगभग दो किलोमीटर का सफर तय करके दरिया में गिराती है। गांव चक्क ढेरां के बचन सिंह का कहना है कि यह पानी इतना गर्म है कि अगर कोई पशु या जानवर इसमें पानी पीने या नहाने जाए तो वह जिंदा नहीं रहेगा।
वाईल्ड लाईफ विभाग नहीं करता कोई गणना
वाइल्ड लाइफ के डीएफओ पी.के. बेहरी कहते हैं कि विभाग इस संबंध में कोई निरंतर गणना नहीं करता। पिछले वर्ष एक बार जरूर इस संबंधी प्रवासी पक्षियों की गणना की गई थी। उसकी जानकारी भी उन्हें नहीं है।
* यह पानी सतलुज दरिया में मिलकर कुछ दूर जाकर नॉर्मल हो जाता है।
-एससी चब्बा, डिप्टी चीफ इंजीनियर (सिविल), श्री गुरु गोबिंद सिंह सुपर थर्मल प्लांट, रोपड़
* थर्मल प्लांट जो पानी सतलुज दरिया में छोड़ता है, वह 5 डिग्री सैल्सियस से अधिक नहीं होना चाहिए। पर आजकल 5 डिग्री सैल्सियस से अधिक तापमान का पानी दरिया में छोड़ा जा रहा है। इसके लिए वे थर्मल से सैस भी ले रहे हैं। वे मामले के संबंध में जानकारी लेकर कार्रवाई करेंगे।
-बीर इंद्रजीत सिंह, मैंबर सैक्रेटरी, पंजाब प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड, पटियाला