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Chandigarh Chandigarh चंडीगढ़. ड्यूटी के प्रति लापरवाही, रिश्वतखोरी, थानों में अत्याचार और ड्यूटी से गैर हाजिर रहने के कारण पिछले चार वर्र्षो में 1200 पंजाब पुलिसकर्मियों को
नौकरी से हाथ धोना पड़ा है। यही नहीं इनमें करीब 150 अफसर और कर्मी ऐसे हैं, जो राज्य की विभिन्न जेलों में संगीन आरोपों में संबंधित अदालतों के फैसले के बाद वे 3 साल से लेकर उम्रकैद की सजा काट रहे हैं।
15000 शिकायतें आयोग के पास
पंजाब मानवाधिकार आयोग के पास 15 हजार शिकायतें आई हैं। इनमें 85 फीसदी शिकायतें सिर्फ पुलिस अफसरों और कर्मचारियों के खिलाफ आई हैं।
आयोग के अधिकारियों का कहना है कि जिन पुलिस अफसरों या कर्मचारियों के खिलाफ फैसला सुनाया जाता है, गृह सचिव और डीजीपी को विशेष तौर पर संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के लिए कहा जाता है।
जांच रिपोर्ट के बाद डिसमिस
पुलिस विभाग के प्रशासन विंग उन्हीं अफसरों व कर्मचारियों को डिसमिस करने के आदेश जारी करता है, जिन्हें जांच रिपोर्ट में दोषी पाया जाता है और धारा 311 के तहत कार्रवाई की जाती है। विंग के उच्चधिकारियों का कहना है कि पहले कई मामलों में देखा गया है कि जिन कर्मचारियों को बिना जांच रिपोर्ट के डिसमिस किया गया था या फिर संबंधित कर्मी को अपना पक्ष रखने का मौका नहीं दिया गया, वह अदालतों का सहारा ले लेते हैं।
* जिन अफसरों व कर्मचारियों को संगीन मामलों में दोषी पाया जाता है, उसे बर्खास्त किया जाता है।
-एन.पी.एस औलख, डीजीपी, पंजाब