जोधपुर. स्कूल के लिए आरक्षित भूमि पर मिलीभगत से पट्टे जारी करवाने के मामले में नगर विकास न्यास ने रविवार को आरएएस अधिकारी तत्कालीन विशेषाधिकारी (भूमि) अनिलकुमार पालीवाल समेत पांच लोगों के खिलाफ सरदारपुरा थाने में मामला दर्ज कर दिया है।
पालीवाल इस समय दौसा के अतिरिक्त जिला कलेक्टर पद पर नियुक्त हैं। उनके अलावा उपनगर नियोजक अनिल माथुर, पटवारी सज्जनसिंह, आवेदक गिरधारीलाल मेघवाल और आम मुख्तयार के तौर पर घनश्याम मेघवाल को भी इस मामले में आरोपी बनाया गया है।
दैनिक भास्कर ने 15 दिसंबर के अंक में ‘स्कूल भूमि पर काट दिए 25 भूखंड’ शीर्षक से खबर प्रकाशित कर यह खुलासा किया था। शनिवार को मुख्यमंत्री के जोधपुर प्रवास के दौरान चुप्पी साधे बैठे रहे न्यास के अफसरों ने रविवार को छुट्टी के दिन यह मामला दर्ज करवाया।
न्यास सचिव कृष्ण कुणाल के निर्देश पर विशेषाधिकारी (भूमि) पी.सी.राठौड़ ने थाने में प्राथमिकी दी। इसमें बताया कि चौपासनी जागीर के खसरा नं-111 में काटे गए भूखंडों में स्कूल के लिए भूखंड आरक्षित किया गया था, जो समर्पण के बाद नगर विकास न्यास के खाते में दर्ज है। इस भूमि के पूर्व प्लान में स्कूल के लिए आरक्षित होने का उल्लेख था, लेकिन इसमें भूखंड संख्या 427 से 451 तक 25 भूखंड अंकित करते हुए जाली तरीके से नियमविरुद्ध प्लान बनाया गया। इस जाली प्लान को उप नगर नियोजक अनिल माथुर ने अनुमोदित करते हुए मूल पत्रावली में लगा दिया और पूर्व प्लान को पत्रावली से गायब करवा दिया। बाद में गिरधारीलाल मेघवाल के नाम से आम मुख्तयार घनश्याम मेघवाल ने न्यास के तत्कालीन विशेषाधिकारी (भूमि) अनिलकुमार पालीवाल से मिलकर 7 पट्टों के लिए आवेदन प्रस्तुत किया।
इस आवेदन पर तत्कालीन लिपिक ने पत्रावली में दर्ज अपनी टिप्पणी में संदेह प्रकट किया था। इसके बावजूद पालीवाल ने पट्टों के लिए राशि जमा करने के आदेश दिए और अवैध पट्टे बनवाने का कार्य किया। प्राथमिकी में कहा गया है कि तत्कालीन विशेषाधिकारी ने वस्तुस्थिति की जानकारी होने के बावजूद आला अफसरों को अंधेरे में रखकर आवेदकों को सात अवैध पट्टे जारी करवा दिए। मातहत कर्मचारियों से भी इन पट्टों के जारी करने की रिपोर्ट पटवारी सज्जनसिंह से प्रात कर ली। स्कूल के लिए आरक्षित भूमि पर जाली दस्तावेज और गलत तथ्यों के आधार पर षडयंत्रपूर्वक अवैध पट्टे जारी करवाने की रिपोर्ट पर सरदारपुरा थाने ने आईपीसी की धारा 420, 267, 468, 471, 379 तथा 120 बी के तहत मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
तीन के खिलाफ विभागीय कार्रवाई
मामला दर्ज करवाने के अलावा न्यास सचिव ने जांच रिपोर्ट के आधार पर कनिष्ठ लिपिक रामस्वरूप शर्मा, कनिष्ठ लिपिक नंदकिशोर बिस्सा और सहायक नगर नियोजक ओ.पी.चौधरी के खिलाफ कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। चौंकाने वाला पहलू यह है कि इस मामले में मूल नक्शा अतिरिक्त कलेक्टर (भूमि रूपांतरण) कार्यालय से भी गायब हो चुका है।
और भी आ सकते हैं घेरे में
फर्जी तरीके से पट्टे जारी करवाने के मामले ने न्यास में खलबली पैदा कर दी है। आरएएस अधिकारी अनिल कुमार पालीवाल के कारनामे इससे पहले भी चर्चा का विषय बन चुके हैं, लेकिन न्यास सचिव ने तब कोई ठोस कार्रवाई नहीं की। इस मामले में चूंकि पट्टों पर खुद न्यास सचिव व अध्यक्ष के हस्ताक्षर थे, इसलिए उन्होंने तत्काल भूमि अवाप्ति अधिकारी बी.एल.मेहरा से जांच करवाई और आखिर में मामला दर्ज करवाते हुए षडयंत्र का सूत्रधार पालीवाल को बता दिया। जिन लोगों के खिलाफ मामला दर्ज करवाया गया है, उनमें बीस सूत्री क्रियान्वयन समिति के सदस्य और भाजपा नेता घनश्याम मेघवाल का नाम भी शामिल है।
अफसरों को ऐसे कई पक्के सबूत मिले हैं, जिससे इस मामले में कई अन्य प्रभावशाली लोगों की लिप्तता साबित हो सकती है। इसलिए मामला भी उसी धारा में दर्ज करवाया गया है, जिसके तहत अन्य लोगों की भूमिका की पड़ताल हो सके।
* स्कूल के लिए आरक्षित भूमि पर पट्टे जारी करने का मामला प्राइवेट पार्टी का है। पट्टे सचिव जारी करता है। मैं उस वक्त ओएसडी पद पर था। मेरा इस मामले से कोई लेना-देना नहीं है। गफलत से मेरा नाम मामले में आया है।
-अनिल पालीवाल, एडीएम, दौसा