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‘घर’ आई लक्ष्मी

जोधपुर. मेहमान नवाजी के लिए अपनी विशिष्ट पहचान रखने वाले मारवाड़ ने रविवार को अपनत्व की एक और मिसाल कायम की। यहां के नुमाइंदों ने एक ऐसी ‘घर’ आई लक्ष्मी मासूम बच्ची को अपनाया है, जिसने हाल ही में कुदरत के कहर से मुक्ति पाई है।

दुनिया के लंबे और कठिन ऑपरेशन से लड़कर दो अतिरिक्त हाथ और पांव से मुक्ति पाने वाली दो वर्षीया लक्ष्मी जब एयरपोर्ट पर उतरी तो उसका यहां जोरदार स्वागत किया गया। इस दौरान अनेक विकलांग बच्चे भी मौजूद थे। एयरपोर्ट पर लक्ष्मी पिता शंभू की बांहों में सिमटी रही। उसकी मां पूनम भी उनके साथ थीं। एयरपोर्ट से उसे माणकलाव स्थित सुचेता कृपलानी शिक्षा निकेतन ले जाया गया।

निकेतन के भैरोंसिंह ने बताया कि लक्ष्मी के परिवार की स्थिति इतनी विकट है कि वे उसका उपचार और शिक्षा करवाने की स्थिति में नहीं हैं। इसलिए उसके पूरे परिवार को गोद लिया गया है। यहां लक्ष्मी अपने परिवार के साथ रहेगी। लक्ष्मी के माता पिता को संस्थान में ही कुछ काम दे दिया जाएगा। लक्ष्मी के आने से 15 दिन पूर्व उसका ताऊ माणकलाव आ चुका है। उसे संस्थान में काम दे दिया गया है।

.. अब तो सचमुच की भगवान
लक्ष्मी की मां पूनम ने कहा कि पहले तो वह अंधविश्वास के कारण लक्ष्मी को भगवान मानती थी, मगर अब तो वह उनके लिए सचमुच की भगवान बन गई है। पिता शंभू ने कहा कि जैसा उसका नाम है, वैसा ही उसका करिश्मा रहा है।

तीन और ऑपरेशन होंगे
संस्था के भैरोंसिंह ने बताया कि लक्ष्मी की शारीरिक संरचना को सामान्य बनाने के लिए अभी तीन और ऑपरेशन होंगे। अभी यह तय नहीं हुआ है कि ये ऑपरेशन कब किए जाएंगे और पहले कौनसा ऑपरेशन होगा। उन्होंने बताया कि लक्ष्मी बिना ऑपरेशन सामान्य बच्चों की तरह जिंदगी नहीं जी पाएगी। उसके दोनों पांवों का ऑपरेशन कर उन्हें सीधा किया जाएगा। अभी उसके पांव टेढ़े हैं। इसके कारण वह फिलहाल चल-फिर नहीं सकेगी। हार्ट का ऑपरेशन कर उसे सही स्थिति में लाया जाएगा। तीसरा ऑपरेशन उसके विशिष्ट अंगों की स्थिति को सुधारने के लिए किया जाएगा।





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