उदयपुर. दि इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियर्स इंडिया (आईईआई) ने केंद्र सरकार को इंजीनियर्स बिल सौंप दिया है। इसमें मेडिकल और वकालत पेशे की तरह इंजीनियरों
के लिए कोड ऑफ कंडक्ट (आचार संहिता) बनाने की सिफारिश की गई है। इसमें अन्य पेशों की तरह इंजीनियरों के लिए भी रजिस्ट्रेशन अनिवार्य करने की बात कही गई है। आईईआई के डायरेक्टर जनरल अरविंदकुमार पूथिया ने ‘भास्कर’ को बताया कि ‘इंजीनियर्स बिल’ को केंद्र की मंजूरी के बाद केवल रजिस्टर्ड इंजीनियर ही निजी तौर पर काम कर सकेंगे।
उन्होंने बताया कि अभी तक इंजीनियरिंग पेशे से जुड़े लोगों के लिए आचरण संहिता नहीं होने से इनकी जवाबदेही तय नहीं थी। इससे इंजीनियरिंग शिक्षा, रिसर्च व प्रोफेशनल प्रेक्टिस की क्वालिटी पर भी प्रतिकूल असर पड़ रहा था। निजीकरण की वजह से इंजीनियरिंग डिग्री देने वाले कॉलेजों की संख्या दिन-ब-दिन बढ़ रही है और हर साल 6 लाख नए इंजीनियर तैयार हो रहे हैं। ऐसे में इंजीनियरों के पेशे में नैतिक मूल्यों से युक्त आचरण व जिम्मेदार बनाने के लिए कानूनी पाबंदी की जरूरत महसूस की जा रही थी। इसी के मद्देनजर आईईआई ने इंजीनियर्स बिल का ड्राफ्ट केन्द्र को सौंपा है। बिल पारित होने के बाद इसे इंजीनियर्स एक्ट-2007 कहा जाएगा।
बिल में शामिल प्रमुख बिंदु
* इंजीनियरों को अधिकार व कत्र्तव्यों की सीमाओं में बांधने के लिए इंडियन कौंसिल ऑफ इंजीनियर्स बनेगी।
* कौंसिल में रजिस्ट्रेशन के बगैर प्रेक्टिस करने वाले भारतीय दंड सहिता के तहत सजा के हकदार होंगे।
* कौंसिल में पंजीकृत इंजीनियर्स को निर्धारित अवधि में रजिस्ट्रेशन का नवीनीकरण करना अनिवर्य होगा।
* कौंसिल इंजीनियरिंग पेशे की छवि को सुधारने के अलावा प्रतिकूल प्रभाव डालने वाली संस्था या व्यक्ति के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई कर सकेगी।