कोटा. पुलिस महकमे में सिपाही का ‘बेल्ट नंबर’, प्लेटफार्म पर कुली का ‘बिल्ला नंबर’ और जेल में अपराधी का ‘कैदी नंबर’ तो सुना था, लेकिन अब कॉलेज
में पढ़ाने वाले शिक्षक का यदि ‘बेल्ट नंबर’ पूछा जाए तो चौंकना जायज है।
राज्य सरकार के निर्देशों की पालना में ट्रेजरी ने राजकीय कर्मचारियों की समस्त जानकारी एकत्रित करने के मकसद से एक फार्म जारी किया है। इसे दिसंबर माह में ही भरकर जमा करना है। ट्रेजरी ने कहा है कि यदि फार्म नहीं जमा किया गया तो वेतन नहीं बनेगा। लिहाजा इस समय हर कोई फार्म भरने में जुटा है। राजकीय कॉलेजों के लेक्चर्स भी इन दिनों यही कर रहे हैं, लेकिन फार्म में पूछे गए ‘बेल्ट नंबर’ की जानकारी ने सभी को आश्चर्य में डाल दिया है। फार्म में पत्नी या पति, बच्चों, पॉलिसी और पैन नंबर के अलावा बहुत सारी जानकारी पूछी गई है।
भविष्य में होगा फायदा
फार्म में दी जाने वाली समस्त जानकारी भविष्य में कर्मचारी को लाभ पहुंचाएगी। ट्रेजरी ऑफिसर श्रीनिवास मीणा ने बताया कि राजकीय कर्मचारियों की जानकारी कम्प्यूटर पर दर्ज की जाएगी। इससे सेवानिवृत्ति के बाद पेंशन केस जल्दी क्लियर होंगे। इतना ही नहीं, कर्मचारी को एक कोड जारी होगा। इस कोड को लॉग इन करते ही समस्त डिटेल सामने होगी।
फार्म में संपूर्ण जानकारी मांगी
सर्विस कोड, एम्पलॉई स्टेटस व टाइप, बच्चों की जानकारी, रिटायरमेंट की तारीख, ब्लड ग्रुप, स्थायी पता, ईमेल समेत बैंक एकाउंट और पॉलिसी की भी जानकारी मांगी है।
* अभी तो मैंने फार्म ही नहीं भरा है। बहरहाल, बेल्ट नंबर का पूछा जाना वाकई चर्चा का विषय है।
—डॉ.पी.के.सिंघल, सीनियर लेक्चरर
* हो सकता है सभी सरकारी कर्मचारियों के लिए एक जैसा फार्म हो। जिन्हें बेल्ट नंबर मिला है वे इस कॉलम को भरेंगे।
—डॉ.बी.एल.शर्मा, विभागाध्यक्ष, भूगोल राजकीय कॉलेज
* हमने तो कॉलम छोड़ दिया है। इसके चक्कर में रहे तो दिसंबर से पहले फार्म ही जमा नहीं कर पाएंगे।
—डॉ.गोविंद शर्मा, वरिष्ठ व्याख्याता
* सभी कर्मियों के लिए एक ही फार्म फार्मेट जारी किया गया है। बेल्ट नंबर कॉलम पुलिस महकमे के लिए है। जिनका बेल्ट नंबर नहीं है, वो इस कॉलम को खाली छोड़ दें।
—श्रीनिवास मीणा, ट्रेजरी ऑफिसर