इंदौर. मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान और दस साल मुख्यमंत्री रहे दिग्विजयसिंह शुक्रवार को इंदौर में थे। दिग्विजय सरकार व भाजपा से जुड़े तमाम मुद्दों पर जमकर बरसे वहीं शिवराज ने भी इसका जवाब दिया।
पूर्व मुख्यमंत्री ने सरकार को खुली चुनौती दी कि उनके कार्यकाल की जांच किसी से भी करवा लें। दम हो तो केस दर्ज करवाएं और गिरफ्तार करें। चार साल में तो एक भी मामला नहीं ढूंढ़ पाए। मुख्यमंत्री सपनों के सौदागर, हवाबाज तथा बेबस हैं और कुछ वजनदार मंत्री उनका जमकर दोहन कर रहे हैं।
इधर मुख्यमंत्री ने कहा मैं राग-द्वेष की राजनीति में भरोसा नहीं करता। मेरा लक्ष्य प्रदेश का विकास व जनता का कल्याण है। दिग्विजय जो भी कहें, मैं कोई प्रतिक्रिया व्यक्त नहीं करूंगा। हम उनके खिलाफ कोई जांच नहीं करवाएंगे। वे अपना काम कर रहे हैं, हम अपना।
ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट
इन्वेस्टर्स समिट लैंडयूज बदलने की घोटाला मीट थी। जमीनों की अफरा-तफरी करने वालों को मौका दिया। ग्रीन बेल्ट तथा आवासीय जमीन को व्यावसायिक करने का षड्यंत्र लोकायुक्त के पास ले जाऊंगा।
ऐसा नहीं है, जिनसे एमओयू साईन हुए हैं उनके साथ अगले महीने बैठ रहे हैं। कहीं कुछ गलत पाया गया तो दुरुस्त किया जाएगा। सबकुछ नियम-कायदों के मुताबिक ही होगा।
मास्टर प्लान
इंतजार किस बात का हो रहा है, समझ से परे है। मुख्यमंत्री की अपरिपक्वता का लाभ उठा रहे हैं यहां के परिपक्व मंत्री।
किन्हीं कारणों से टलता रहा, अब जल्दी ही आ जाएगा। कहीं कोई गड़बड़ी नहीं है। थोड़ा धीरज रखे।
उपचुनाव परिणाम
कांग्रेस ने एकजुट होकर चुनाव लड़ा और हम जीते। जब भी हम एक होकर लड़ेंगे हमें कोई हरा नहीं सकता।
परिणामों पर गंभीरता से विचार कर रहे हैं। कारणों की समीक्षा के बाद ही कुछ कह पाऊंगा। जो कमियां मिलेंगी, दूर करेंगे।
भ्रष्टाचार का मुद्दा
किस स्तर का भ्रष्टाचार चल रहा है यह डंपर घोटाले तथा खरगोन में विधायकों की पिटाई से सामने आ चुका है।
सारे आरोप निराधार हैं। चुनाव के दौरान विधायकों की पिटाई को भ्रष्टाचार से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए।
अगला चुनाव
चुनाव हर हालत में मई 2008 से पहले करवाए जाएंगे। परिस्थितियां ऐसी है कि कांग्रेस का सत्ता में आना तय है।
जब होंगे, तब लडेंगें। कांग्रेस इतनी चिंतित क्यों है। उपचुनाव के परिणामों को अगले चुनाव का पैमाना न मानें।