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छुट्टियों के मूड की फिल्म

परदे के पीछे.welcome नायक की मां ने अनजाने में अपराधी से प्यार करने की सजा पाई थी, इसलिए नायक को पालने वाला उसका मामा उसकी शादी साफ-सुथरे परिवार में करना चाहता है, परंतु नायक जिस लड़की से प्यार करता है उसके तीनों भाई जरायम पेशा अपराधी हैं। अनीस बज्मी ने अपने अपराधी पात्रों को इस कदर हंसोड़ रचा है कि वे लतीफेबाज-ए-आजम राजू श्रीवास्तव के रिश्तेदार लगते हैं।

इसी तरह उनके साफ-सुथरे पात्र भी एकदम बेदाग नहीं हैं और भलाई का कैरीकेचर लगते हैं। सलमान अभिनीत ‘नो एंट्री’ की कामयाबी के बाद हास्य के उसी लहजे में उन्होंने ‘वेलकम’ रची है। उनके हास्य रचने का अंदाज देखिए कि आग में फंसी लड़की को बचाने पहुंचा नायक सुंदरी को एकटक देखते हुए बेहोश हो जाता है और नायिका उसे कंधे पर लादकर बाहर लाती है।

इस मनोरंजक कपोल-कल्पित फंतासी के रचने के पीछे भी यथार्थ है कि दाऊद के भाई अनीस को शायरी करने का भ्रम था और उनका सगा पेंटिंग का भरम पाले था। यह भी तथ्य है कि जवानी में अभिनेता बनने का सपना देखने वाले जल्दी अमीर होने के लिए अपराध जगत से जुड़ जाते हैं।

बहरहाल इस दो घंटे चालीस मिनट की फिल्म में अनीस बज्मी ने हर पल हंसाने और गुदगुदाने की कोशिश की है और कुछ फार्स भी रचे हैं, मसलन विवाह में रुकावट डालने के लिए रोपित मल्लिका शेरावत अपराध सरगना को जिल्लेइलाही बोलकर बतर्ज अनारकली इंसाफ की दुहाई देती है।

फिरोज खान की शायद यही आखिरी परफॉर्मेस है, क्योंकि वे बहुत बीमार हैं। उनकी मौजूदगी वाले दृश्यों में कॉमिकल इतालवी अपराध सरगना उभरकर आता है और वे भय से ज्यादा गुदगुदी का अहसास जगाते हैं।

गौरतलब बात यह है कि अनीस बज्मी के प्रस्तुतिकरण पर फिरोज खान की निर्देशकीय लहर का असर देखा जा सकता है। नाना पाटेकर और अनिल कपूर भी इसी रंग में नजर आते हैं और अक्षय कुमार हरफनमौला कलाकार हैं। सुंदर और लचीली कैटरीना कैफ से ज्यादा बड़ी भूमिका मल्लिका शेरावत की है, जिनकी भूमिका में तीन रंग हैं। भव्य और भड़कीला दुबई भी फिल्म में एक पात्र की तरह उभरा है।

विदेशी फर्टिलाइजर से जन्मी ताजातरीन समृद्धि के दौर में लोग हंसना-हंसाना चाहते हैं और समाज के जलसाघर में आजकल फार्स का जोर है। इसी मूड को भुनाने के लिहाज से ‘वेलकम’ आंख और कान को सुख देने के लिए रची गई है और इन दोनों के बीच मजबूर से दिमाग को अलसाए रखने में यह फिल्म कामयाब होगी।

यह मनोरंजन जगत का वह नुस्खा है जो दवाओं में कंपोज का असर रखता है और शराबनोशों के मुहावरे में खुमार ही खुमार देता है। सिनेमा के टिकट में बिन वीजा दुबई की यात्रा सा मजा लूटिए।





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आपके विचार
deepak mishra ( from kola
Saturday, 22nd Dec 2007, 13:28
'kisi bhi vichar ke bare me vichar kerne ke liye gahan vichar ki jarurat hoti hai"
MANISH
Saturday, 22nd Dec 2007, 21:26
MAIN TO KAHTA HUN YE FILM HIT NAHI SUPERHIT NAHI USSE BHI KAHIN JYADA CHALEGI.KYONKI ISME AKKI (AKSAY)JO HAI, .............................BEST OF LUCK AKKI