भोपाल. पैसे की कमी के चलते भारत या विदेश के किसी उच्च शिक्षण संस्थान में प्रवेश नहीं ले पा रहे विद्यार्थियों केलिए यह अच्छी खबर है। अब शिक्षा ऋण सस्ते हो रहे हैं। क्योंकि ऋण लेने वाले ऐसे विद्यार्थियों को अब पढ़ाई की अवधिके दौरान ब्याज का भुगतान नहीं करना होगा। यह भार केंद्र सरकार वहन करेगी। यह व्यवस्था आगामी वर्ष से लागू की जा रही है।
मानव संसाधन विकास मंत्रालय व योजना आयोग ने इसकी योजना को मंजूरी दे दी है। जिसके लिए 11वीं पंचवर्षीय योजना में चार हजार करोड़ रुपए का प्रावधान रखा गया है। इस ब्याज के रूप में केंद्र सरकार हर साल लगभग 650 करोड़ रुपए खर्च करेगी।
कैसे मिलेगा लाभ: 20 हजार रुपया या इससे कम की मासिक आय वाले परिवार के विद्यार्थी को इसका लाभ मिलेगा। उन्हें कर्ज के द्वारा की जा रही पढ़ाई के पाठ्यक्रम की अवधि में ब्याज का भुगतान नहीं करना होगा। ऐसे विद्यार्थियों को किस्त शुरू होने के समय से ही ब्याज देना पड़ेगा।
ऐसा भी होगा: सभी व्यवसायिक और तकनीकी स्नातक एवं स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम में प्रवेश के लिए कर्ज लेने वाले पात्र विद्यार्थियों को ब्याज में राहत मिलेगी। इनमें एआईसीटीई, एमसीआई और यूजीसी से मान्यता प्राप्त पाठ्यक्रम शामिल हैं। कोई भी विद्यार्थी केवल एक ही बार इस योजना का लाभ ले सकेगा।
पांच लाख पढ़ रहे कर्ज के सहारे: इस समय व्यावसायिक पाठ्यक्रमों में प्रवेश लेने वाले करीब 50 लाख विद्यार्थियों में से शिक्षा ऋण लेकर पढ़ाई करने वाले करीब पांच लाख विद्यार्थी ऐसे हैं जिनके परिवार की मासिक आय 20 हजार या इससे कम है।
एक सर्वे के मुताबिक भारत या विदेशों से एमबीए करने वाले छात्र ही ज्यादातर शिक्षा ऋण ले रहे हैं। रिजर्व बैंक के ताजा आंकड़ों के अनुसार देश में मार्च 2006 में 9962 करोड़ के शिक्षा ऋण लिए गए थे। यह आंकड़ा मार्च 2007 तक 15 हजार करोड़ रुपए पहुंच गया है।
अब तक क्या थी व्यवस्था..
इस समय शिक्षा ऋण लेने पर इसे चुकाने की किस्तें पढ़ाई पूरी होने के बाद या छात्र को नौकरी मिलने पर शुरू की जाती है। लेकिन ऋण की राशि जारी होने पर ब्याज का मीटर शुरू हो जाता है। ऋण लेने से पाठ्यक्रम पूरा होने की अवधि तक की ब्याज की राशि एक बार मे जोड़ कर किस्तें तय की जाती हैं। इससे मासिक किस्तों की राशि लगभग दोगुनी हो जाती थी। अब किस्त जमा करना शुरू करने से लेकर पूरा ऋण चुकाए जाने तक की अवधि का ही ब्याज देना होगा।