भोपाल.
मध्यप्रदेश में राष्ट्रीय राजमार्र्गो की हालत चिंताजनक है। इनमें से कुछ राजमार्ग तो तय मापदंडों के मुताबिक ही नजर नहीं आए हैं। खासतौर से इंदौर-हरदा-बैतूल-नागपुर रोड काफी खराब है। रतलाम के पास भी एक राजमार्ग खस्ताहाल पाया गया है। प्रदेश की सड़कों की यह असलियत देश में पहली बार हो रहे एक अत्याधुनिक सर्वेक्षण से उजागर हुई है। सर्वेक्षण अभी जारी है।
यह काम केंद्रीय सड़क अनुसंधान संस्थान कर रहा है। इसके तहत देश के लगभग 60 हजार किलोमीटर लंबे राष्ट्रीय राजमार्र्गो की कुंडली तैयार हो रही है। अब तक साढ़े सात हजार किलोमीटर सड़कों की असलियत दर्ज हो चुकी है। इसमें मप्र की लगभग ढाई हजार किमी लंबी सड़कें शामिल हैं।
सर्वेक्षण के शुरुआती नतीजे प्रदेश के सड़क निर्माताओं के लिए अच्छी खबर नहीं हैं। अत्याधुनिक उपकरणों से सुसज्जित एक वैन हर सड़क का डाटा बेस तैयार कर रही है। यह काम अगले एक साल में पूरा होने की उम्मीद है।
संस्थान को इस सर्वे के लिए लगभग दस करोड़ रुपए मिले हैं। इसमें से दो करोड़ रुपए से यह वैन तैयार हुई है। यह वैन राजस्थान और हरियाणा के राजमार्र्गो का डाटाबेस रिकार्ड करने के बाद पिछले बीस दिनों से मप्र की सड़कों पर है।
वैन में कौन?
वैन में एक-एक वैज्ञानिक, तकनीकी अधिकारी और परियोजना सहायक तैनात हैं। वे चलती गाड़ी में कंप्यूटर पर सारे डाटा को सेव करते हैं। चूंकि इस वाहन में एक बार में दो ही व्यक्ति बैठ सकते हैं, इसलिए टीम के अन्य सदस्य दूसरे वाहन में पीछे चलते हैं।
पांच-पांच सौ जीबी की हार्ड डिस्क में डाटा सेव करके दिल्ली भेजे जाते हैं। वहां पर इनका विश्लेषण किया जा रहा है। संस्थान ने पहली बार राष्ट्रीय राजमार्र्गो की मेडिकल रिपोर्ट तैयार करने के लिए इस तकनीक का इस्तेमाल किया है।
कब हुई शुरुआत
एक दिसंबर 2007 को आगरा-बांबे रोड का ग्वालियर से सर्वे शुरू हुआ। टीम लीडर वैज्ञानिक एके सागर के नेतृत्व में चार सदस्यीय दल इस वैन में सवार है, जो शनिवार को दिल्ली लौट जाएगा। फिर दूसरे टीम लीडर के बतौर तकनीकी अधिकारी एमपी सिंह इस वैन को लेकर बुंदेलखंड और बघेलखंड से गुजरने वाले राजमार्र्गो का सर्वे करेंगे। अगले बीस दिन सर्वे करने के बाद यह वैन उत्तर प्रदेश चली जाएगी।
>> मप्र में राष्ट्रीय राजमार्र्गो की हालत अच्छी नहीं है। कुछ तो मापदंड के मुताबिक ही नहीं हैं। सड़कों की जांच का यह अभिनव प्रयोग देश में पहली बार हो रहा है। सरकार को रणनीति बनाने के लिए ये डाटा बेस बहुत उपयोगी साबित होंगे।
-एके सागर, टीम लीडर, सर्वेक्षण दल
चप्पे-चप्पे पर नजर
वैन में पांच कैमरे, कंप्यूटर, लेजर बीम आदि उपकरण चप्पे-चप्पे की बारीकी रिकॉर्ड करते हैं। पहली बार रोड इनवेंट्री डाटा बेस बनाया जा रहा है। यह वैन सेटेलाइट के माध्यम से संचालित ग्लोबल पोजीशनिंग सिस्टम से जुड़ी हुई है।
वैन के अगले भाग में ऊपर तीन और पिछले हिस्से में नीचे दो कैमरे लगे हैं। वेन के अगले हिस्से में लगे उपकरणों के माध्यम से सड़क की चौड़ाई, उसके आसपास का हाल, अतिक्रमण, मोड़ का आकार-प्रकार आदि रिकार्ड होता है।
पिछले हिस्से में लगे कैमरे सड़क की सतह, ढाल व गड्ढे का आकार एवं पेंच रिपेयर की स्थिति को दर्ज करते हैं। यहां तक कि एक मिमी तक के गड्ढ़े को कैमरा कैद कर लेता है। इस तरह इन कैमरों की मदद से कंपलीट ओवरव्यू, सड़क की सतह, ढाल, कर्वेचर, गड्ढे और पेवमेंट (शोल्डर) की हालत रिकार्ड हो जाती है।