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एक दाने से 85 बालियां

बिलासपुर.bali किसानों ने धान के एक-एक दाने को सोने की तरह बोया। एक फीट की दूरी पर पौधे लगाए। कम पानी, कम खाद और कम मेहनत में इतना उत्पादन हुआ कि सारे रिकार्ड धवस्त हो गए। किसानों ने इस प्रयोग में सामान्य पद्धति से डेढ़ गुना अधिक उत्पादन लिया।

राज्य के तकरीबन 50 किसानों ने इस तकनीक का प्रयोग किया। इसके नतीजे इतने सकारात्मक रहे कि खुद किसान चकित हैं। धमतरी, राजनांदगांव, बालोद, धमधा, कुरुद सहित कई गांवों में श्री विधि से खेती की गई। धमतरी के किसान आरके भिड़े ने आधा एकड़ में श्री विधि का प्रयोग किया। उन्होंने 5204 किस्म के धान 25 सेंटीमीटर की दूरी पर लगाए।

उनके खेत में एक पौधे से 45 से 85 कंसे निकले। इससे उन्होंने 22 क्विंटन उत्पादन लिया। इसी तरह धमधा के कृषि वैज्ञानिक उमेश पटेल ने आधा एकड़ में आईआर 36 किस्म का धान लगाया। जुलाई में इसकी रोपाई की। अगस्त में औसत आठ कंसे आए। इसके बाद सितंबर में यह बढ़कर 50-60 तक पहुंच गए। इनमें से अधिकतम 50 बालियां (इफेक्टिव टिलर) निकले।

श्री पटेल ने बताया कि उन्होंने रोपा और श्री पद्धति का तुलनात्मक अध्ययन भी किया। जिसमें अंतर स्पष्ट दिखता है। श्री विधि में ज्यादा बालियों के साथ दानों का वजन भी अधिक निकला। श्री विधि में 1000 दानों का वजन 2.5 ग्राम निकला। जबकि रोपाई पद्धति में यह 2.4 ग्राम मिला। इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के एटिक संचालक डा. एसएस टुटेजा ने बताया कि यह पद्धति कई मायनों में ज्यादा फायदेमंद है। कम लागत में इससे दोगुना उत्पादन लिया जा सकता है।





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