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Chhattisgarh
Bilaspur Bilaspur बिलासपुर.
शहर से गंदगी व भारी वाहनों का दबाव रोकने लागू की गई योजनाएं नकारा साबित। सात करोड़ खर्च करने के बाद भी न तो यातायात व्यवस्था में कोई सुधार आया और न ही डेयरियों को व्यवस्थित किया जा सका। शहर को स्वच्छ व सड़कों को भारी वाहनों के दबाव से मुक्त करने के लिए गोकुलनगर व ट्रांसपोर्ट नगर की योजना तैयार करने की जिम्मेदारी नगर निगम प्रशासन को दी गई।
निगम प्रशासन ने योजना तैयार कर शासन से गोकुलनगर के लिए साढ़े तीन करोड़ व ट्रांसपोर्ट नगर के लिए साढ़े सात करोड़ की योजना का प्रस्ताव तैयार कर भेजा। शासन ने इन योजनाओं के लिए राशि स्वीकृत कर ट्रांसपोर्टनगर के लिए राजमार्ग पर ग्राम परसदा मेनरोड पर तथा गोकुलनगर के लिए ग्राम अमेरी में भूखंड स्वीकृत किया। इस राशि से निगम ने ट्रांसपोर्टनगर व गोकुलनगर डेवलप किया।
निगम प्रशासन की मानें तो गोकुलनगर में नाली, डब्ल्यूबीएम सड़क, पंप, डेयरी के शेड का माडल, विद्युतीकरण में अब तक करीब ढाई करोड़ खर्च किए जा चुके हैं, लेकिन इतनी राशि खर्च करने के बावजूद यहां मात्र १0-११ डेयरी संचालक ही डेरा डाले हुए हैं।
निगम प्रशासन की सर्वे सूची के मुताबिक शहर में करीब डेढ़ सौ डेयरियां संचालित हैं। प्रथम चरण में मात्र १३२ प्लाट काटे गए। आनन-फानन में जिला प्रशासन के आदेश पर जब करीब साल भर पूर्व डेयरियों को गोकुलनगर के माडल शेड में शिफ्ट किया गया। अब गोकुल नगर की हालत एक ऐसे बाजार की तरह है, जो बसने से पहले ही उजड़ गया।
कमोबेश यही हाल साढ़े सात करोड़ की ट्रांसपोर्ट नगर योजना का भी है। शहर में आए दिन यातायात व्यवस्था गड़बड़ाने के कारण डेवलप किया गया ट्रांसपोर्टनगर बदहाल है। सड़कों पर बड़े-बड़े गड्ढे उभर आए हैं। निगम की सर्वे सूची के मुताबिक शहर में करीब नौ सौ से एक हजार के लगभग व्यवसायी ट्रांसपोर्टिग का काम करते हैं। जहां प्रथम चरण में करीब ६ सौ प्लाट काटे गए हैं।
इस योजना का उद्देश्य शहर की सड़कों से यातायात का दबाव खत्म कर ट्रांसपोर्ट व्यवसाय से जुड़े व्यवसायियों को एक जगह एकत्र करना है, ताकि भारी वाहनों की शहर के अंदर एंट्री न हो। निगम के अफसरों की मानें तो योजना की लागत ११ करोड़़ तक पहुंच गई है, जिसमें से अभी तक ८0 माडल दुकानों, सड़क, विद्युत व्यवस्था, पानी, २ पार्किग आदि बनाने में करीब पांच करोड़ खर्च हो चुके हैं, लेकिन राजमार्ग से अभी तक ट्रांसपोर्ट व्यवसायियों को नहीं हटाया जा सका है। जिस उद्देश्य से यह योजना तैयार की गई थी, वह भले ही यथावत है।
इसके योजनाकारों व इंजीनियरों के दिन फिर गए। नगर निगम की योजनाएं शहर के नेताओं, अफसरों व व्यापारियों के लिए इनवेस्टमेंट का जरिया बनकर रह गई हैं। इन दोनों योजनाओं में ऐसे-ऐसे लोगों ने भविष्य में भूख्ांड का रेट बढ़ने की आस में भूखंड खरीदा है, जिनका डेयरी या ट्रांसपोर्ट के व्यवसाय से कोई लेना-देना ही नहीं रहा है।
उन लोगों ने तो बस यही सोचकर यहां अपनी पूंजी का छोटा सा हिस्सा इनवेस्ट किया है कि सस्ते में भूखंड मिल रहा है, आज नहीं तो कल डेवलप होगा तो कम से कम दस से पंद्रह गुना लाभ मिलेगा।
भाग खड़े हुए डेयरी संचालक
शहर से दूर बिजली, पानी, सड़क की अव्यवस्था के कारण शहर से हटाए गए ३३ डेयरी संचालकों में से मात्र १७ डेयरी संचालक गोकुलनगर जाने तैयार हुए। शेष संचालकों ने या तो इतनी दूर जाकर कारोबार करने की बजाय अपनी डेयरी ही बंद कर दी या फिर शहर सीमा से लगे ग्राम पंचायत क्षेत्रों में अपनी डेयरियां जमा लीं।
अव्यस्था के कारण १७ में से ६-७ डेयरी संचालक वहां से भाग आए। इसके बाद अभी वहां मात्र १क्-११ डेयरी संचालक इस उम्मीद में डंटे हुए हैं कि कभी न कभी डेयरियां यहां आबाद होंगी।
क्या कहते हैं ट्रांसपोर्ट व्यवसायी
ट्रांसपोर्टनगर में निगम की माडल दुकान में व्यवसाय कर रहे जय बजरंग ट्रांसपोर्ट के संचालक त्रिलोक सिंह ने कहा कि यहां बिजली व पानी की समस्या है। एक बोरिंग है, जो शाम को एक बार ही खुलता है, ठंड में तो ठीक है, गर्मी में मुश्किल हो जाएगा। श्री सिंह ने बताया कि यहां कारोबार लगभग न के बराबर है। कई दिन तो बोहनी तक नहीं होती।
जिला व निगम प्रशासन के दबाव में यहां चले आए नहीं तो मेनरोड में पांच सात सौ पर-डे का कारोबार हो जाता था, अब कुछ नहीं है। वहीं रोड ऊपर के ट्रांसपोर्ट व्यवसायी खुश हैं। बाहर ही सौदा तय हो जाता है, इसलिए अंदर कौन आएगा। फिर यहां न तो मिस्त्री हैं, न पार्ट्स दुकान। 15-20 ट्रांसपोर्ट व्यवसायी कारोबार में तेजी आने की आस में बैठे हैं।
गुमटियां खाली पड़ी हैं, लेकिन जब तक सभी ट्रांसपोर्ट व्यवसायियों को एक जगह लाकर नहीं बसाया जाता, तब तक यहां कारोबार संभव ही नहीं है। ज्यादातर ट्रांसपोर्टरों ने भूखंड खरीदकर माडल दुकानों में कब्जा तो जमा रखा है, लेकिन न तो कोई यहां दुकान बनाने में रुचि ले रहा है और न कारोबार करने में व्यवसायी व्यवसाय के लिए किराए में ली गई माडल दुकानों में ताला लटकाकर मेनरोड में कारोबार कर रहे हैं। हम आ गए अब पछता रहे हैं।
बागबान बेट्री के संचालक वासुदेव अरोड़ा ने का भी कहना है कि यहां कारोबार लगभग शून्य है। सभी का परिवार है। यदि यही हाल रहा तो सभी व्यवसायी फिर से मेन रोड पर डेरा जमा लेंगे। इसलिए प्रशासन को चाहिए कि व्यवसायियों को यहां शिफ्ट करें, तभी उनके परिवारों का पेट चलेगा।
>> भारी वाहनों की आवाजाही से डब्ल्यूबीएम रोड में गड्ढे हुए हैं। अब डामरीकरण का प्रस्ताव बनाकर टेंडर की प्रक्रिया शुरू की जानी है। ट्रांसपोर्टनगर में पानी की नहीं, टाइमिंग की समस्या है। सड़क किनारे के ट्रांसपोर्ट व्यवसायियों को जल्द हटाया जाएगा।
—ओपी तिवारी कार्यपालन अभियंता
>> गोकुल नगर में ४-५ डेयरी संचालकों द्वारा शेड बनवाया जा रहा है। १0-१२ डेयरी संचालक अभी भी वहां व्यवसाय कर रहे हैं। गोकुलनगर आबाद होगा, परंतु कब, इसकी कोई अवधि नियत नहीं है। चिलिंग प्लांट लगाने के लिए निजी कंपनियां भी आ रही हैं।
—सुधीर गुप्ता, कार्यपालन अभियंता नगर निगम
>> गोकुलनगर व ट्रांसपोर्टनगर में भारी लेन-देन की शिकायत मिलती रही है। सब बैंक बैलेंस बढ़ाने में लगे हैं। शासन व निगम की राशि का दुरुपयोग किया जा रहा है। यह कभी सफल नहीं हो सकता। इसे या तो बंद कर देना चाहिए या समय सीमा निर्धारित कर कार्रवाई करनी चाहिए।
—बसंत शर्मा नेता प्रतिपक्ष नगर निगम