Astrology
Astro Speak Astro Speak रोग उपचार.
चिकित्सकीय अर्थो में पक्षाघात या लकवा रोग स्नायुतंत्र के विकार से होता है। जब किसी दोष के कारण रक्त वाहिनियों में किसी अंग को खून की आपूर्ति में बाधा पड़ती हो तो वह अंग शिथिल होकर बेकार हो जाता है और व्यक्ति को अपाहिज होकर जीवन बिताना पड़ता है। खासकर वृद्धावस्था में यह रोग हो जाता है। अवसाद, अत्यधिक तनाव, ब्लड प्रेशर व मस्तिष्क में स्नायुतंत्र पर चोट से भी पक्षाघात हो सकता है।
ज्योतिषीय मत : स्नायुतंत्र का कारक ग्रह शनि है। रक्त का कारक ग्रह मंगल है। लग्न, पंचम और नवम भाव मस्तिष्क से संबंध रखते हैं और इन भावों की राशियां क्रमश: मेष, सिंह व धनु हैं। ऐसे में शनि व मंगल के नीच, वक्री व पापयुक्त होने, लग्न, पंचम व नवम भाव पर पाप का प्रभाव होने तथा मेष, सिंह व धनु राशि में पाप ग्रहों के मौजूद होने से पक्षाघात की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
अनुभूत विचार : देखने में आया है कि लकवा पीड़ितों की कुंडली में लग्न में मंगल व बुध है। पंचम में शनि नीच का है। नवम भाव में षष्ठेश शुक्र है। मंगल की अष्टम भाव पर नीच दृष्टि है और मेष, सिंह व धनु राशि पर पाप प्रभाव है।
ज्योतिषीय उपचार : शनिवारीय या रविवारीय अमावस्या, त्रयोदशी, पूर्णिमा या फिर कोई शुभ नक्षत्र देखकर लहसुन की पांच कलिका को कूटकर पौन किलो दूध में उबालें। जब आधी कटोरी दूध रह जाए तब मिश्री डालकर रख लें। इसे पंद्रह दिन तक रोगी को दें। इसके लिए अश्विनी, अनुराधा, श्रवण नक्षत्र को चुनें।
इसी प्रकार शनि व मंगल की वस्तुओं का दान करें। इनके मंत्रों की एक या अधिक माला नियमित जपनी चाहिए। जातक स्वयं या उसको सुनाकर कोई अन्य हनुमान चालीसा का पाठ करे। कुछ माह तक मंगलवार व शनिवार को जातक पर थोड़ा तेल उतारकर हनुमानजी के मंदिर में जहां अखंड दीया जलता हो, वहां चढ़ाएं और रोगी के शीघ्र आरोग्य होने की प्रार्थना करें।