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आयकर में छूट चाहिए तो जानवर गोद लें

जयपुर. जयपुर जंतुआलय जानवरों को संरक्षण और उनकी बेहतर देखभाल के लिए ‘एडॉप्ट द एनिमल’ योजना शुरू कर रहा है। योजना के तहत जानवरों को निश्चित अवधि के लिए गोद दिया जाएगा। गोद लेने वालों को आयकर में छूट मिलेगी, साथ ही संबंधित जानवर के पिंजरे पर उनका प्रचार बोर्ड भी लगाया जाएगा। योजना का मुख्य उद्देश्य लोगों में जानवरों के प्रति प्रेम और संरक्षण भावना को बढ़ाना है।

गोद योजना शुरू करने वाला यह राज्य का पहला जंतुआलय होगा। जंतुआलय गोद योजना के प्रबंधन और विकास के लिए समिति गठित करेगा, जो व्यक्ति विशेष, संस्था या कॉपरेरेट घरानों से ज्यादा से ज्यादा धन जुटाने का काम करेगी। इस धन का उपयोग जंतुआलय के विकास, जानवरों की देखभाल और उनके लिए संरक्षण कार्यक्रमों पर होगा।

उप मुख्य वन्य जीव प्रतिपालक शिवचरण गुप्ता के अनुसार जन भागीदागी बढ़ाने के लिए समिति आयकर विभाग से अनुमति लेगी कि उसे दान करने वालों को आयकर कानून की धारा 80 जी के तहत छूट मिले। सोसायटी में दानदाताओं को भी शामिल किया जाएगा, जो पैसे के उपयोग की जानकारी रख सकेंगे। जिस जानवर को गोद लिया जाएगा, उसके पिंजरे पर संबंधित संस्था या घराने का प्रचार बोर्ड लगाया जाएगा। इससे अन्य लोगों में भी उनके संरक्षण की भावना पैदा होगी। भविष्य में नाहरगढ़ बायोलॉजीकल पार्क में जानवरों के लिए बनाए जा रही योजना में भी इस स्कीम को शुरू किया जाएगा।

* कोई चेरिटी संस्था जो जानवरों के हित में कार्य कर रही है, उसका रजिस्ट्रेशन करने के बाद दानदाताओं को आयकर कानून की धारा 80 (जी) के तहत 50 प्रतिशत तक आयरकर छूट देने का प्रावधान है।
-मिथलेश झा, अतिरिक्त आयुक्त, आयकर विभाग

* जंगल वन्य जीवों से खाली होते जा रहे हैं। इनके संरक्षण के लिए अब जनभावना और जागरूकता दोनों की जरूरत है। एडॉप्ट द एनिमल योजना से लोगों में जानवरों के संरक्षण के लिए भावनाएं पैदा होंगी।
-आर.एन. मेहरोत्रा, प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं मुख्य वन्य जीव प्रतिपालक

यूं रहेगी व्यवस्था
गोद देने के लिए बड़े जानवरों के एक या अधिक, जबकि पक्षी विशेष की जंतुआलय में मौजूद संख्या को शामिल किया जाएगा। इसके लिए जानवरों का महीनेभर का खाने-पीने और दवा के खर्च का ब्यौरा बनाया जा रहा है। शुरुआती चरण में जानवरों को कम से कम 5 साल और अधिकतम 10 साल के लिए गोद दिया जाएगा। ताकि जानवर विशेष की सुरक्षा और प्रबंधन के लिए लंबे समय तक राहत मिल सके। इसके लिए जू प्रशासन एनजीओ, इंस्टीट्यूशन, बिजनेस ग्रुप्स, क्लब आदि को वरीयता देगा।





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