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गोहत्या से आक्रोश आगजनी व तोड़फोड़

कपासन (चित्तौड़गढ़). जवानपुरा गांव में गाय की हत्या से शनिवार को तनाव व्याप्त हो गया। गुस्साई भीड़ ने एक बस फूंक दी और निर्माणाधीन दुकानों में तोड़फोड़ गोहत्या से आक्रोश आगजनी व तोड़फोड़की। हालात तब और बिगड़ गए, जब भीड़ कथित आरोपी के गांव पर धावा बोलने पहुंच गई। दूसरी ओर से भीड़ पर पथराव व फायरिंग शुरू हो गई। इसमें 12 लोग घायल हो गए। ग्रामीण व पुलिस भी आमने-सामने होते रहे। हालात काबू करने के लिए पुलिस को आंसू गैस छोड़नी पड़ी। प्रशासन ने क्षेत्र में निषेधाज्ञा लागू कर दी है।

शुक्रवार दोपहर बाद गायब हुई गाय का शनिवार सुबह खेत में क्षत विक्षत शव देख कर उचनार पंचायत क्षेत्र के लोग भड़क गए। दोपहर करीब 12 बजे बड़ी संख्या में ग्रामीण गाय के शव के साथ आकोला-शनिमहाराज मार्ग स्थित गुमानपुरा चौराहा पर जमा हो गए और दोषियों की गिरफ्तारी की मांग करते हुए रास्ता जाम कर दिया। भीड़ ने समुदाय विशेष की उमंड मार्ग पर अर्ध निर्मित दुकानें क्षतिग्रस्त कर दीं। इस बीच पुलिस ने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की, मगर ग्रामीण आरोपियों को सामने लाने की मांग पर अड़ गए। भीड़ ने इसी दौरान कपासन की तरफ से आई एक निजी बस को फूंक दिया। दोपहर करीब ढाई बजे भीड़ ने दो किलोमीटर दूर सिंधियों का खेड़ा गांव पर धावा बोलने के इरादे से कूच कर दिया। पीछे पुलिस जाप्ता भी दौड़ा।

पुलिस को रोकने के लिए लोग कांटे, पत्थर आदि रास्ते में बिखेरते हुए आगे बढ़े। भीड़ गांव में घुस पाती, उससे पहले ही दूसरी ओर से गोफण से पथराव और हवा में फायरिंग शुरू हो गई। गांव में घुसने में विफल भीड़ ने खेतों में आग लगाने का प्रयास किया। तब पुलिस ने लाठीचार्ज कर दिया, लेकिन हालात काबू में नहीं होने पर आंसू गैस छोड़ी। तीन बजे बाद जवानपुरा चौराहा की ओर स्थित एक मंगरी की तरफ से 12-13 महिलाएं पत्थरबाजी करती हुए पुलिस की तरफ बढ़ी। पुलिस ने मंगरी को घेर कर साढ़े तीन बजे स्थिति को काबू में किया। कलेक्टर पीएल अग्रवाल व एसपी भूपेन्द्र साहू के मौके पर पहुंचने पर चार बजे ग्रामीणों से उनकी समझाइश शुरू हुई।

क्यों बिगड़ा माहौल
उचनार के पूर्व सरपंच माधवलाल जाट के अनुसार जवानपुरा के हजारीदास वैष्णव की गाय शुक्रवार दोपहर तक उसके खेत में बंधी थी। उसकी पत्नी को गाय शाम को वहां नहीं मिली। शनिवार सुबह हजारीदास की पत्नी जूतों के चिह्नें के आधार पर गाय को ढूंढ़ने निकली तो तीन-चार सौ मीटर दूर खेत पर खून के निशान दिखे। पास में ही गाय का कटा सिर पड़ा था। यह खेत अन्य समुदाय के व्यक्ति का था। गाय की कुछ हड्डियां और अवशेष पास में ही पूर्व सरपंच माधवलाल जाट के सूखे कुएं में मिले। गांव व आसपास के गांवों मेंइस खबर से आक्रोश फैल गया।

खिड़कियों से कूदकर जान बचाई
उग्र ग्रामीणों ने बस को घेरकर आग लगा दी थी। उसमें सवार लोगों ने खिड़कियों से कूदकर जान बचाई। आग बुझाने आई दमकल की गाड़ी के टायरों की हवा निकाल दी गई और वॉल्व खोलकर पानी फैला दिया गया। भीड़ के कारण दमकलकर्मियों ने भी इसका विरोध नहीं किया। इसके अलावा भीड़ ने पुलिस के तीन वाहन भी क्षतिग्रस्त कर दिए।





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