इंदौर.
भाजपा के ग्रामीण नेता व कार्यकर्ता अनुशासन के कारण सांवेर उपचुनाव में हार के कारणों पर भड़ास नहीं निकाल पाए। बैठक ले रहे सह संगठन मंत्री भगवतशरण माथुर ने एक लाइन में हार का कारण बताने को कहा तो एक कार्यकर्ता ने कहा ‘सुन लो हम फिर हारेंगे’। सांसद सुमित्रा महाजन तथा विधायक मनोज पटेल बैठक में शामिल नहीं हुए।
रामसेतु की रक्षा के लिए दिल्ली में 30 दिसंबर को होने वाले प्रदर्शन की तैयारियों के लिए आयोजित बैठक में सांवेर की हार पर चर्चा शुरू हुई और कार्यकर्ता बोलने लगे तो श्री माथुर ने एक लाइन की व्यवस्था दी।
एक ही कारण दोहराए जाने लगे तो उन्होंने हस्तक्षेप किया और एक लाइन की बात दोहराई। इस पर भड़के एक कार्यकर्ता ने कहा मुझे इतना ही कहना है कि हम फिर हारेंगे। इस पर हॉल में सन्नाटा छा गया और नेता बगलें झांकने लगे।
श्री माथुर ने कहा जीत का श्रेय हर कार्यकर्ता लेता है लेकिन हार की जिम्मेदारी कोई नहीं लेता। हमें सांवेर की हार का बदला अगले चुनाव में जीत के संकल्प के साथ लेना चाहिए।
जो कारण कार्यकर्ताओं ने बताए हैं उन पर पार्टी के वरिष्ठ नेता विस्तार से चर्चा करेंगे। जो निष्कर्ष आएंगे उनसे आपको भी अवगत कराएंगे। जिलाध्यक्ष डॉ. रीता उपमन्यु, प्रदेश मंत्री बाबूसिंह रघुवंशी, कैलाश पाटीदार, प्रेमनारायण पटेल, संतोष मालवीय, सुरेशसिंह पंवार, गणपतसिंह गौड़, सत्यनारायण आजाद, अरूण शर्मा, कंचनसिंह चौहान, देवराजसिंह परिहार सहित कई नेता बैठक में मौजूद थे।
एक लाइन में कहें तो इसलिए हारे
उम्मीदवार ठीक नहीं था।
भारतीय जनशक्ति छोड़कर आने के बाद टिकट देने से कार्यकर्ता नाराज हो गए।
पोलिंग एजेंट भी बिक गए, खंड प्रभारी बेक ार थे।
चुनाव लड़ाने वाले क ार्यालय में बैठक र गप्प लड़ाते रहे।
जमकर गुटबाजी थी। नेता एक-दूसरे को नीचा दिखाने में लगे रहे।
चुनाव संचालन ठीक नहीं था। कार्यकर्ताओं की उपेक्षा की गई।
जिन्हें उम्मीदवार ढूंढ़ने भेजा था उन्होंने गलत जानकारी दी।
आखिरी दो दिन की व्यवस्थाएं गडबड़ा गई थीं। जरूरी सामान भी नहीं बंटा।
नेता जातिगत समीकरण का ठीक से अनुमान नहीं लगा पाए।
हिंदूवादी संगठनों पर क ी गई सख्ती से भी नुक सान हुआ।
कार्यकर्ता मतदान के दिन बिलकुल सक्रिय नहीं रहे।
गावों में गुल बिजली व खराब सड़कों के कारण भी हारे।