अमृतसर.
एक समय पंजाब से बाहर धूम मचाने वाला अमृतसरी डोर का पिन्ना आज चाइनीज ‘गट्टू’ के ‘खौफ’ के साए में दम तोड़ता नजर आ रहा है। यही नहीं, सरहद पार दस्तक देने वाली शहरी पतंगों का जोश भी ठंडा होता जा रहा है। पतंगों के त्योहार लोहड़ी से पहले खुश दिखने वाले सैकड़ों चेहरे उदास दिखाई दे रहे हैं।
एक साल पहले दिल्ली से आई चाइनीज डोर के गट्टू ने कारोबारियों की नींद हराम कर दी है। थोक हो या परचून हर दुकानदार इसके प्रचलन से परेशान हंै। उनका मानना है कि इससे अमृतसरी पिन्ने और पंतगों की बिक्री में कमी से शहर की पुरानी रिवायत खत्म हो रही है और कारोबार पर भी विपरीत असर पड़ रहा है। मांग के बावजूद भी गट्टू पर पाबंदी की मांग कर रहे हैं।
नाइलोन के धागे से तैयार यह चाइनीज डोर काफी लचीली होती है। इसे बनाने में कैमिकल्स और लोहे के चूरे का प्रयोग होता है। इसका टूटना तो दूर, इससे उड़ाई गई पतंग को काटना किसी दूसरी डोर के बस की बात नहीं। इससे हाथ में लगे चीर का जख्म भरना भी आसान नहीं है।
अमृतसर काइट एसोसिएशन के प्रधान सुभाष चंद्र बहल का कहना है कि पहले पंजाब सरकार ने पंतग और डोर पर 12.50 प्रतिशत वैट लगा दिया, अब गट्टू ने गले में फंदा डाल दिया है। जो एक बार इस डोर को ले जाता है, फिर नहीं आता। जब पंतग कटेगी नहीं तो मांग कहां से होगी। इससे पंतगों की बिक्री भी काफी कम हो गई है।
दिल्ली में इस डोर के बिजली ट्रांसफार्मर पर गिरने से मैट्रो रेल तक रूक गई थी। अहमदाबाद में कई पक्षी मारे गए थे। तभी से वहां इसकी बिक्री पर प्रतिबंध है। दुकानदार रविकांत बब्बर, रोहित महाजन और कृपाल सिंह ने बताया कि कामकाज के दिनों में भी वह बेकार बैठे हैं। एक गट्टू में 12 से 18 गोट डोर होती है। पिन्ने और चरखड़ी की डोर उसके सामने टिक नहीं पाती। ऐसा ही रहा तो कोई दूसरा काम ढूंढना पड़ेगा।