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Chhattisgarh
Raipur Raipur रायपुर. विश्रामपुरी थाने पर नक्सली हमला और निहत्थे पुलिसकर्मियों की हत्या से सकते में आए पुलिस महकमे ने करीब दो माह पुरानी रणनीति में बदलाव करते हुए बस्तर के आधा दर्जन थानों में हथियार लौटा दिए। फोर्स भी बढ़ाई गई और सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए जा रहे हैं। थानों को निहत्था करने के मामले में अंदरूनी तौर पर महकमे की कड़ी आलोचना हो रही थी। राजनैतिक ही नहीं, प्रशासनिक हल्कों में भी कहा जा रहा था कि जवानों को मौत के मुंह में सिर्फ इसलिए धकेला गया, ताकि हथियारों को लूटे जाने से बचाया जाए।
रणनीति को लेकर पुलिस को बस्तर में जिन मोर्चो पर करारी शिकस्त झेलनी पड़ी, उसका एक उदाहरण थानों से हथियार हटाने का फैसला भी था। पुलिस ने बड़ी खामोशी से विश्रामपुरी, इसी थाने की चौकी बांसकोट, बकावंड, करपावंड और माकड़ी थानों से हथियार हटाए थे। इसके पीछे सोच ये थी कि नक्सली आमतौर से थानों पर हमला हथियार लूटने के उद्देश्य से करते हैं। हथियार ही नहीं रहेंगे तो थानों से क्या लूटा जाएगा?
दरअसल इस मामले में छत्तीसगढ़ पुलिस ने उड़ीसा का सिस्टम फालो किया। वहां कुछ नक्सल प्रभावित थानों से हथियार हटाए गए। उड़ीसा में नक्सलवाद की जड़ें गहरी नहीं हैं। वहां के नक्सली संसाधनों के साथ हथियार जुटाने में लगे हैं।
उड़ीसा पुलिस की सोच है कि ऐसा करके वे हथियार बचा लेंगे। ऐसे में, छत्तीसगढ़ पुलिस को आशंका था कि नक्सली हथियार लूटने के लिए सीमा पार कर यहां के थानों पर हमला कर सकते हैं। इसलिए उड़ीसा सीमा से लगे छत्तीसगढ़ के इन आधा दर्जन थानों से हथियार हटा दिए गए। लेकिन छत्तीसगढ़ को इस फैसले की कीमत चार जानें देकर चुकानी पड़ीं। उड़ीसा के नक्सलियों ने विश्रामपुरी थाने में घुसते ही निहत्थे पुलिसवालों को गोलियों से खामोश कर दिया। तब से ही हथियार हटाने के फैसले की चीर-फाड़ चल रही थी।
सूत्रों ने बताया कि विश्रामपुरी हादसे के तीन दिन बाद ही उच्चस्तर पर फैसला किया गया कि पुलिस को कहीं भी निहत्था नहीं छोड़ा जाएगा। सभी थानों को हथियार तो लौटाए ही गए, फोर्स भी बढ़ा दी गई। ऐसे सभी थानों में, जहां नक्सल मूवमेंट कम है, सुरक्षा इंतजाम बढ़ाए जाने लगे हैं।
फैसला किसका ? : थानों से हथियार हटाने का फैसला किसने किया, इस मामले में गहरी खामोशी है। कोई इस फैसले की जिम्मेदारी न तो लेने के लिए तैयार है, न किसी और पर डालने के लिए क्योंकि इससे सच उजागर होने का अंदेशा है।
थाने मजबूत : डीजीपी : डीजीपी विश्व रंजन ने माना कि हथियार हटाए गए थे, लेकिन ये भी कहा कि सुरक्षा बंदोबस्त पुख्ता थे। दो-तीन सौ हथियारबंद आतंकी हमला करेंगे तो पांच-छह लोग उन्हें रोकेंगे और भगा देंगे, यह मुश्किल है। थानों की सुरक्षा मजबूत की जा रही है।