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बसें कम, नाक में दम

हिसार. रोडवेज बसों की किल्लत ने स्टूडेंट्स, पुलिस और रोडवेज में त्रिकोणीय संघर्ष शुरू करके जिला प्रशासन की नाक में दम कर दिया है। आएदिन स्टूडेंट और रोडवेज कर्मचारियों के बीच हाथापाई की नौबत आ जाती है। विरोधस्वरूप लगाए जाने वाले जाम के चलते पुलिस कर्मचारियों को रोडवेज व स्टूडेंट्स के साथ दो-चार होना पड़ रहा है।

जिले में रोडवेज बसों की कमी के चलते शहर तथा आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यार्थियों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। विद्यार्थियों को रोजाना सरकारी और निजी बस के परिचालकों से दो-चार होना पड़ता है। पास होने के बावजूद वे कई बार अपने संस्थान नहीं पहुंच पाते तो कई बार घर नहीं पहुंच पाते।

स्टूडेंट्स का कहना है कि ओवर लोड के कारण परिचालक उन्हें बस में बैठाने से मना कर देते हैं। छात्रों की संख्या को देखकर सरकारी बस चालक बिना रुके ही आगे निकल जाते हैं तो प्राइवेट बस चालक अक्सर स्टूडेंट को बिठाने से ही मना कर देते हैं। इस संबंध में कई बार प्रदर्शन कर बसों की मांग रखी गई लेकिन कुछ समय तो ठीक रहता है। बाद में वही ढाक के तीन पात वाली स्थिति होती है।

क्या कहते हैं रोडवेज महाप्रबंधक
रोडवेज डिपो के महाप्रबंधक सतपाल सिंह का कहना है कि वास्तव में जिले में यह समस्या गंभीर बनी हुई है। यूनिवर्सिटी, डिग्री कॉलेज, इंजीनियरिंग कॉलेज, सरकारी व प्राइवेट स्कूल की बढ़ती संख्या के कारण विद्यार्थियों में निरंतर इजाफा हो रहा है जो इस समस्या का मूल कारण है। उन्होंने बताया कि शीघ्र ही बैठक करके परिवहन आयुक्त से 106 बसों की मांग की जाएगी।

नई नीति पर विचार
स्टूडेंट से भारी भरकम फीस वसूलने वाले सरकारी एवं गैर सरकारी संस्थाएं तथा स्कूल संचालक उचित किराए पर विद्यार्थियों के लिए कम से कम बस स्टैंड से अपने इंस्टीट्यूट तक बसें उपलब्ध करवा सकते हैं। ऐसा करने पर समस्या का काफी हद तक समाधान हो सकता है। रोडवेज महाप्रबंधक इस नीति पर विचार कर रहे हैं।

कितनी बसों की है जरूरत
हिसार और हांसी डिपो के पास 194 बसें हैं जबकि 210 बसें स्वीकृत हैं। वर्तमान हालात को देखते हुए 300 बसों की आवश्यकता है।





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