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शनि के आंगन में खेल रही हैं सरस्वती

यमुनानगर. जगाधरी के शनि मंदिर के दो पुजारियों ने आस-पड़ोस की झुग्गी-झोपड़ियों के बच्चों को पढ़ाने के लिए एक पाठशाला शुरू की है। इसमें ४५ बच्चे पढ़ने आते हैं। इन पुजारियों का संकल्प है कि वे इन बच्चों को सभ्य इंसान बनाएंगे। शनि मंदिर में बीते तीन महीनों से पाठशाला चल रही है।

मंदिर के पुजारी उदयवीर शर्मा व संतराम ने कुछ दिनों तक स्वयं हाथों में किताब लेकर बच्चों को ककहरा सिखाया। पुजारियों के इस परोपकार से मंदिर में आने वाली समाजसेविका नंदा काफी प्रभावित हरुई और उन्होंने बच्चों को नि:शुल्क पढ़ाने का क्रम जारी कर दिया।

पुजारियों के इस सेवा-भाव को देखकर एक अन्य समाज सेवी सतपाल गेरा भी मदद के लिए आगे आ गए। उन्होंने ठंड में सिकुड़ते बच्चों को जर्सियां व कापी-किताबें उपलब्ध करई। पंडित उदयवीर शर्मा की पत्नी रजनीश शर्मा पाठशाला में आने वाले बच्चों को प्रतिदिन गायत्री मंत्र व धार्मिक शिक्षा देती हैं।

भिखारी बच्चों के हाथों में किताब
मंदिर के आसपास अनेक झुग्गी-झोपड़ी हैं। इनमें रहने वाले छोटे बच्चे मंदिर के बाहर भीख मांगते थे। इन्हें देखकर मंदिर के दोनों पुजारियों के मन में ख्याल आया कि इन्हें सभ्य इंसान बनाया जाए।

इसके बाद वे बच्चों के मां-बाप से मिले और उन्हें बच्चों को मंदिर में पढ़ने के लिए भेजने को प्रेरित किया। शुरुआत में 8-१क् बच्चे ही पढ़ने के लिए आए और धीरे-धीरे इनकी संख्या बढ़कर ४५ तक पहुंच गई।

पंडित संतराम सुबह पूजा-अर्चना से निवृत्त होकर बच्चों को लेने निकल पड़ते हैं। बकौल उदयवीर शर्मा पाठशाला में पढ़ने वाले बच्चों में एक भी पढ़-लिख कर बड़ा आदमी बन पाया तो हम अपनी मेहनत को सफल मानेंगे।





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