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Madhya Pradesh
Gwalior Gwalior ग्वालियर. चंबल नदी में मर रहे घड़ियालों की मौत का कारण सीसा माना जा रहा है। बिसरा रिपोर्ट में सीसा (हेवी मेटल) का प्रदूषण पाए जाने का उल्लेख है। चंबल नदी में हेवी मेटल कहां से आया, इसकी जांच शुरू हो गई है। रिपोर्ट के बाद वन विभाग ने चंबल की मछलियों, पक्षियों की बीट, एलगी के अलावा यमुना नदी के पानी का परीक्षण कराने का निर्णय किया है।
मध्यप्रदेश व उत्तरप्रदेश की सीमा में बहती चंबल नदी में बीते कुछ दिनों से लगातार घड़ियालों की मौत हो रही है। उत्तरप्रदेश के क्षेत्र में अभी तक 30 व मध्यप्रदेश में शनिवार का दिन मिलाकर 20 घड़ियाल मर चुके हैं। मरने वाले घड़ियाल साढ़े छह से दस वर्ष की आयु के हैं। उनकी पोस्टमार्टम रिपोर्ट में आमाशय में अल्सर, खून की नली में डेमेज व लिवर सिरोसिस मिला है। मृत घड़ियालों के लिवर पूरे काले हो चुके हैं। जबकि यह हल्के पिंक कलर में होना चाहिए। मरे हुए घड़ियालों का बिसरा बीते दिनों आईवीआरआई बरेली भेजा गया था। वहां कई बिन्दुओं को लेकर जांच की गई। जांच होने के बाद रिपोर्ट संबंधित विभाग को सौंप दी गई है।
सूत्रों के अनुसार, रिपोर्ट में सीसा का प्रदूषण होना पाया गया है। जहां चंबल नदी यमुना में मिलती है, वहां सीसा (लेड) मिलता है। इसलिए यमुना नदी के पानी की जांच करने का निर्णय लिया गया है। वन संरक्षक आरबी सिन्हा ने गत दिवस मुरैना पहुंचकर पांच दिन के अंदर चंबल नदी की मछलियां, एलगी व दो-दो किलोमीटर क्षेत्र के पानी का परीक्षण करने के लिए सैम्पल एकत्रित करने के का निर्णय लिया हैं।
भिंड जिले में बह रही चंबल नदी के हर दो किलोमीटर अंतराल के पानी (सैम्पल) लिए जाएंगे। इन सैम्पलों को एकत्रित कर अलग-अलग जगह पहुंचाया जाएगा। पानी व एलगी के सैम्पल लखनऊ जबकि मछली के अन्य दूसरी जगह पहुंचाए जाएंगे। इनका बायो कैमिकल एनालिसिस कराया जाएगा। रिपोटर्स आने के बाद घड़ियालों को बचाने के लिए भविष्य की योजना तैयार की जाएगी।
चंबल के पानी में कमी नहीं
भिंड जिले में मर रहे घड़ियालों वाले क्षेत्र का पानी (चंबल नदी) एकत्रित कर बीते दिनों एमआईटीएस व प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड को जांच के लिये पहुंचाया गया था। वहां की रिपोर्ट वन विभाग को मिल गई है। उसमें पानी में कहीं कोई कमी नहीं पाई गई।
* वन विभाग द्वारा हेवी मेटल्स की जांच के लिए मछली, एलगी व जगह-जगह से पानी लेकर जांच कराई जाएगी। जहां घड़ियाल मर रहे हैं, वहीं की मछली व एलगी लेकर भी जांच होगी। इसके सैम्पल एकत्रित किए जा रहे हैं।
—आरबी सिन्हा, वन संरक्षक
* एक रिपोर्ट में सीसा का प्रदूषण पाया गया है। यह प्रदूषण यमुना नदी में मिलता है। इसलिए कई चीजों की जांच कराई जा रही है।
—एसपी शर्मा, डीएफओ मुरैना