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Chhattisgarh
Bilaspur Bilaspur रायगढ़.
यह अंधविश्वास ही है कि शहर के पुच्छापारा में एक देवी उपासक की मौत के बाद उसका शव मंदिर में इस आस्था के साथ सुरक्षित रखकर पूजा की जा रही है कि वह 3 दिन बाद जी उठेगा।
वार्ड नंबर 8 पुच्छापारा निवासी रामप्रसाद का 25 वर्षीय पुत्र मनोज बघेल आज से 5-6 साल पहले सब्जी बेचता था। पिछले 3 साल से उसे देवी मां की कथित सवारी आने लगी और वह देवी मां की भक्ति में लीन हो गया। पुच्छापारा स्थित उसके मकान के सामने ही 6 अप्रैल 2004 को देवी मां का मंदिर बनाया गया, मनोज वहीं समय देने लगा।
मोहल्लेवालों ने बताया कि देवी मां के भक्त मनोज पर शहर के कई प्रतिष्ठित लोगों की आस्था थी। मंदिर में उससे मिलने लोगों का तांता लगा रहता था। गुरुवार को कुछ खा लेने से मनोज की तबीयत गंभीर हो गई। पहले उसे अशर्फी देवी चिकित्सालय, फिर जिला अस्पताल ले जाया गया। जब स्थिति में सुधार नहीं हुआ, तो परिजन उसे जिंदल अस्पताल ले गए। जहां कल सुबह 7 बजे उसकी मौत हो गई। पर उसके परिजन व उस पर विश्वास रखने वाले लोगों ने इसे नकार दिया।
बताया जाता है कि मरने से पहले मनोज ने किसी से कहा था कि 3 दिन तक उसकी लाश मंदिर में रखी जाए, वह लौट आएगा। लिहाजा इसी आस्था व विश्वास पर चलते हुए उसके परिजन कल शाम 7 बजे लाश लेकर पुच्छापारा पहुंचे व उसे मंदिर में रखकर अनुष्ठान कर रहे हैं। लोगों को भी किसी चमत्कार का इंतजार है। यही कारण है कि यहां मंदिर में लोगों का तांता लगा हुआ है। कुछ इसे अंधविश्वास मान रहे हैं, तो कुछ इस पर आस्था भी जता रहे हैं।
* ‘मुर्दे को जिंदा करने के लिए लाश को रखने की जानकारी नहीं है। हो सकता है कि मृतक के परिजन अपने किसी रिश्तेदार के आने की प्रतीक्षा कर रहे हों। पुलिस इस पर नजर रखे हुए है।’
- जयंत थोरात एसपी-रायगढ़
* यदि किसी की मौत हो चुकी है, तो उसका पुन: जिंदा होना नामुमकिन है। यह धार्मिक आस्था और अंधविश्वास की बात है। पहले भी कुछ ऐसे मामले हुए हैं, किंतु ऐसे प्रयासों में हर बार असफलता ही हाथ लगी है।
- डा. दिनेश मिश्र, अध्यक्ष-अंधश्रद्धा निमरूलन समिति