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नरम हैं, पर नियम के पक्के हैं मनप्रीत

चंडीगढ़. minister एक अधेड़ महिला कार्यालय में आती है और बादल को बिजली का बिल दिखाकर कहती है- ‘मैं आठ हजार भरने में असमर्थ हूं। अब आपका भरोसा है।’ असमंजस में पड़े बादल ने जब पूछा कि इतना बिल क्यों आया? तो महिला ने ईमानदारी से स्वीकार किया कि कुंडी लगाते वक्त पकड़ी गई तो जुर्माने समेत बिल आया है।

उसकी साफगोई से परेशान मंत्री जी बोले- ‘बिल तो माफ नहीं हो सकता, अलबत्ता मैं इसे किस्तों में लेने के लिए कह दूंगा।’ उन्होंने बाहर बैठे एग्जीक्यूटिव इंजीनियर को अंदर बुलाया, लेकिन महिला नहीं मानी और बोली- ‘किस्तों के पैसे होते तो आपके पास क्यों आती।’

महिला की मासूमियत ने कहीं-न-कहीं बादल को प्रभावित जरूर किया। वे ओएसडी चरणजीत सिंह से बोले- ‘इसे हर माह की किस्त मेरी ओर से दे दिया करो।’ बादल हफ्ते में कम-से-कम तीन दिन अपने क्षेत्र में रहने की कोशिश करते हैं और सुबह ९:00 से शाम 3:00 बजे तक लोगों से मिलते हैं।

घरेलू झगड़े, गांव का विकास, पुलिस से जुड़े केस और शिकायतों का सिलसिला जारी रहता है। उस महिला के जाने के बाद एक सज्जन खुद को कोच बताकर बादल से मिलते हैं और साथ आए एक लड़के की तरफ इशारा करते हुए कहते हैं- ‘ये मेरा शागिर्द है और इसे स्टेट टीम में शामिल करवाना है।’ बादल बोले- ‘अगर इसकी बांहों में दम है तो यह टीम में आएगा। मैं इसकी सिफारिश नहीं करूंगा।’ कोच का चेहरा उतर गया और वे वहां से खिसक लिए।





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