जोधपुर. जरूरत के बावजूद जोधपुर इंटरनेशनल एयरपोर्ट की दौड़ में शामिल नहीं है। कारण है यहां के सिविल एयरपोर्ट के ट्रैफिक की एयरफोर्स के रनवे पर निर्भरता। इसके चलते एयर कनेक्टिविटी की संभावनाएं यहां तब तक अमली जामा नहीं पहन सकतीं, जब तक अपने रनवे के साथ यहां का सिविल एयरपोर्ट अलग न बने।
सिविल फ्लाइट्स का संचालन एयरफोर्स के रनवे से होने से सीधे तौर पर एयरपोर्ट अॅथारिटी ऑफ इंडिया का ट्रैफिक कंट्रोल पर नियंत्रण नहीं है। रात में तो सिविल फ्लाइट्स को लैंडिंग की अनुमति ही नहीं मिलती। देर शाम भी विशेष अनुमति से ही फ्लाइट्स उतरती हैं। दिन में सिविल फ्लाइट्स की टाइमिंग तय करना प्राधिकरण के हाथ में नहीं है। इसे देखते हुए पिछले दिनों जब एयरपोर्ट सलाहकार समिति ने नए एयरपोर्ट का प्रस्ताव केंद्र को भेजा तो फिर यह मुद्दा चर्चा में आ गया।
सुविधाएं बढ़ाई, संभावनाएं नहीं
एयरपोर्ट कंट्रोलर मनोज पंत के अनुसार एयरपोर्ट ऑथारिटी ऑफ इंडिया ने एयरपोर्ट पर करीब 13 करोड़ की लागत से नया टैक्सी ट्रैक बनाया है। एप्रन का विस्तार करने के साथ ही वहां हाईमास्ट लाइट्स आदि की सुविधा मुहैया की गई हैं। इससे एक ही समय में एप्रन में तीन से चार एयरक्राफ्ट्स को पार्किग की सुविधा हो गई है। सुविधाओं की इन बढ़ोतरी के कारण माना जा रहा है कि नया एयरपोर्ट बने तो कुछ आधारभूत सुविधाएं पहले से मौजूद होंगी।
मजबूरी में चार्टर्ड का सहारा
पिछले कुछ समय से जोधपुर में चार्टर्ड फ्लाइट्स की आमदरफ्त बढ़ी है। बीते दिनों जोधपुर में अरुण नायर व लिज हर्ले की चर्चित शादी के अलावा जिंदल व पोद्दार परिवार में हुए विवाह समारोह में कोलकाता व मुंबई से चार्टर्ड प्लेन में 300 से अधिक यात्रियों ने सफर किया।
* जोधपुर में पहले की अपेक्षा अधिक फ्लाइट्स और अधिक यात्री भार बढ़ा है। सलाहकार समिति की बैठक में अलग से एयरपोर्ट बनाने की सलाह दी थी, उसे आगे भेज दिया गया है। समिति की बैठक प्रत्येक तीन माह में होगी, जिसमें अन्य सिफारिशों पर ध्यान दिया जाएगा।
-मनोज पंत, एयरपोर्ट कंट्रोलर
* यहां विश्व के शहरों से सीधी फ्लाइट नहीं हैं, जिससे टूरिस्ट 200-300 डॉलर खर्च कर दिल्ली में रात बिताना पसंद करते हैं। अब एयर टैक्सी सर्विसेज की जरूरत महसूस की जा रही है ताकि टूरिस्ट इस पूरे सर्किट को अपनी सुविधानुसार घूम सके।
-गजसिंह, अध्यक्ष, इंडियन हेरिटेज होटल्स एसोसिएशन
इसलिए है जरूरत
* पर्यटन का हॉट डेस्टिनेशन है, लेकिन राजस्थान में आए विदेशी पर्यटक कनेक्टिविटी नहीं होने से जोधपुर नहीं पहुंच पाते हैं।
* हैंडीक्राफ्ट इकाइयां : 1200 से अधिक
* सालाना एक्सपोर्ट लगभग 1500 करोड़, इकाइयों के प्रतिनिधि व विदेशी बायर्स की जोधपुर से विदेशों में नियमित विजिट।
* बॉर्डर क्षेत्र होने की वजह से रक्षा प्रतिष्ठानों की अनेक इकाइयां, आर्मी का कोर हेडक्वार्टर, बीएसएफ का फंट्रियर हेडक्वार्टर, एयरफोर्स स्टेशन समेत काजरी, आफरी, डिफेंस लैब, कृषि अनुसंधान केंद्र, रिमोट सेंसिंग सेंटर, जेडएसआई-बीएसआई, नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी, आयुर्वेदिक यूनिवर्सिटी होने से विशेषज्ञों की आवाजाही।
ये हैं फायदे
* एयरपोर्ट पर दिन रात लैंडिंग व टेकऑफ की सुविधा।
* एयर ट्रैफिक कंट्रोल पर एयरपोर्ट आथारिटी ऑफ इंडिया का अधिकार।
* डिफेंस सेवाओं की गोपनीयता सुरक्षित।
* बड़े विमानों के लिए विशेष हवाई पट्टी का निर्माण, जिससे बाद में अंतरराष्ट्रीय हवाई सेवाएं शुरू की जा सके।
* रात्रि में एयरक्राफ्ट पार्किग की सुविधा।
*कितनी फ्लाइट्स प्रतिदिन- 9
*कहां के लिए जोधपुर से- दिल्ली, मुंबई, जयपुर, उदयपुर, जैसलमेर, आगरा और औरंगाबाद
*और कहां चाहिए- अहमदाबाद, लखनऊ, कोलकाता, बेंगलूर, चेन्नई, हैदाराबाद और चंडीगढ़