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मोदी का सफरनामा

नई दिल्ली.मोदी की जिंदगी का सफरनामा 17 सितंबर 1950 को मेहसाणा जिले के छोटे से वाडनगर शहर में एक निर्धन परिवार से शुरू हुआ। वह घांची समुदाय के हैं जो अन्य पिछड़ा वर्ग में आता है।

शुरू से ही दृढ़ इच्छा शक्ति रखने वाले मोदी वाडनगर रेलवे स्टेशन पर चाय बेचने और बाद में अहमदाबाद में एक कैंटीन चलाकर संघर्ष करते हुए गुजरात में सत्ता के सर्वोच्च शिखर तक पहुंचे हैं।

संघर्षो के बीच ही मोदी ने वाडनगर में अपनी स्कूली शिक्षा पूरी की और आरएसएस प्रचारक रहते हुए 1980 के दशक में गुजरात विश्वविद्यालय से राजनीति शास्त्र में एमए किया। उनमें नेतृत्व क्षमता छात्र जीवन से ही दिखने लगी थी जब वह अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के नेता के रूप में उभरे।

वर्ष 1987 में संघ से भाजपा में आने के बाद मोदी के राजनीतिक जीवन की शुरुआत हुई। एक वर्ष के भीतर ही उन्हें पार्टी की गुजरात इकाई का महासचिव बना दिया गया। 1995 में उन्हें भाजपा ने दिल्ली भेजा और वह राष्ट्रीय सचिव बनाए गए।

गुजरात दंगों के लिए भारी आलोचनाओं सामना करने के बावजूद उन्होंने इसे अपने लाभ के लिए इस्तेमाल किया और गौरव यात्रा निकाल कर दिसंबर 2002 के विधानसभा चुनाव में भारी बहुमत से भाजपा की झोली में जीत डाली।

22 दिसंबर 2002 को मोदी को मुख्यमंत्री पद के दूसरे कार्यकाल के लिए शपथ दिलाई गई। पहले कार्यकाल में उन्होंने जहां अपने हिंदुत्व की छवि को धार दी वहीं दूसरे कार्यकाल में वह विकास पुरुष के रूप में खुद को स्थापित करने में जुट गए।





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