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विचार और विकास के गठजोड़ से मिली गद्दी!

मुंबई.Modiगुजरात की जनता के मतों से भारतीय राजनीति के चुनावी समाजशास्त्र में फिर एक योग घटित हुआ है। भाजपा ने एक बार फिर चुनाव पूर्व तमाम दावों और संभावनाओं को खारिज करते हुए गुजरात में स्पष्ट बहुमत हासिल कर ली है। मोदी इसे गुजरात की साढ़े पांच करोड़ जनता की जीत बता रहे हैं जबकि वे यह भूल जाते हैं इस पांच करोड़ जनता में वे लोग भी हैं जिनका सबकुछ गुजरात के दंगों में स्वाहा हो चुका है।

विचारधारा और विकास का गठजोड़
मोदी की इस जीत को विभिन्न नजरियों से देखा जा रहा है। दिल्ली यूनिवर्सिटी में राजनीतिशास्त्र के प्रोफेसर राकेश सिन्हा का मानना है कि यह विचारधारा और विकास के गठजोड़ की जीत है। एकात्ममानववाद के प्रस्फुटिकरण के लिए इन दोनों का गठजोड़ होना आवश्यक है। नरेंद्र मोदी ने गुजरात में बगैर किसी अपराधबोध के विचारधारा और विकास के गठजोड़ के साथ कार्य किया जिसके फलस्वरूप उन्हें बड़ी सफलता मिली।

विकास के कामों में उनकी ईमानदारी ने एंटी इंक्म्बेंसी फैक्टर को रोके रखा। राकेश सिन्हा ने कहा कि गुजरात में सोनिया गांधी की व्यक्तिगत हार भी हुई क्योंकि प्रदेश स्तर पर मोदी का मुकाबला करने के लिए कोई कद्दावार नेता नहीं था, और चुनाव की कमान सोनिया गांधी ने संभाल रखी थी। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश के बाद गुजरात चुनाव में राहुल गांधी की दूसरी हार है।

प्रोफेसर सिन्हा ने कहा कि गुजरात के चुनाव परिणाम से इस बात को बल मिलता है कि गुजरात की जनता ने हिंदुत्व के राजनीतिक स्वरूप को स्वीकार किया है। मोदी को मिले व्यापक जनसमर्थन का एक कारण उनके आतंकवाद विरोधी सख्त तेवर को मानते हुए प्रो. सिन्हा ने कहा कि नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रवादी स्वर को पहले से अधिक मुखर किया है। प्रो. सिन्हा का कहना है कि नरेंद्र मोदी की सरकार ने तुष्ष्टिकरण पर आधारित कांग्रेस की पूर्व व्यवस्था को खत्म किया।

कांग्रेस की कमजोरी का फायदा मिला
दिल्ली यूनिवर्सिटी में अर्थशास्त्र के पूर्व प्रोफेसर विनोद प्रसाद सिंह का मानना है कि गुजरात में कांग्रेस ने भी वही कार्ड खेला जिसका मुकाबला कर पाने में मोदी माहिर रहे हैं। कांग्रेस को बुनियादी मुद्दों पर बात करनी चाहिए थी। इससे परिणाम बहुत हद तक बदल सकते थे। हालांकि प्रो. सिंह का मानना है कि मोदी ने गुजरात में विकास का काम किया है लेकिन वह अभी आम आदमी के पूरे हक में नहीं आ सका है। सिंह का मानना है कि मोदी का फिर से सत्ता में आना बहुत सुखद नहीं है। वे कहते हैं कि विकल्पहीन और कमजोर विपक्ष का फायदा मोदी को मिला।

मोदी का कद बढ़ा
इस परिणाम से भाजपा में नरेंद्र मोदी का कद काफी बढ़ गया है। मोदी ने यह जीत भाजपा के कद्दावर नेताओं के विरोध के बावजूद हासिल की है। जहां एक ओर भाजपा के असंतुष्ट नेता मोदी के रजनीतिक भविष्य को मटियामेट करने पर तुले थे वहीं मोदी ने इस चुनौती को भी सहजता से लिया और अपने स्टैंड पर कायम रहे। वे सभी मुद्दे जो मोदी के वोटों को काटने के लिए छेड़े गए थे, उसे भी मोदी ने अपने पक्ष में कर लिया। सोनिया गांधी द्वारा मौत का सौदागर कहने पर उन्होंने सोहराबुद्ीन का सहारा लिया और जनसमर्थन को अपने पक्ष में करने में कामयाब रहे। पार्टी के अंदर का भितरघात भी मोदी को बहुमत हासिल करने से नहीं रोक सका। इस जीत के साथ ही मोदी का कद भाजपा की दूसरी पीढ़ी के नेताओं में सबसे ऊपर चला गया है।





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आपके विचार
hari singh solanki(KATHAX
Sunday, 23rd Dec 2007, 21:55
modi ki jit ek hinduthv our vikash ki jith hei .our kthornirnyu avn anushan ka mukabala tha .parti anushash par chalti hei.dhamangka our apane virodhiyo ko sahi samav par makul javab dena unki kashiyth thi .gujrat ki jit ek sachai our himmath ki jit hei iske patr matr modi our vaha ke karykartha ki mehanth ka ful hei modi badhai ke pathr hei
Vikas Hooda
Monday, 24th Dec 2007, 4:12
Is any of the BJP senior leader happy by the victory of Modi... Modi is a leader by his own.. Advani fearing from Modi.. every leader in the centre think that what will happen if Modi came to Delhi for one month. All the carders of BJP and SANGH will follow him. because he is the only man in the country, who is been trusted by the Hindus. because he never gives away his position under pressure. Modi Man of Words....