नई दिल्ली. संसदीय समिति की सिफारिश अगर मान ली गई तो केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) का दायरा बढ़ाकर उसे खुफिया जानकारी एकत्रित करने का अधिकार भी दे दिया जाएगा। तब उसका नाम होगा केंद्रीय खुफिया एवं जांच ब्यूरो (सीबीआईआई)। नए रूप में ब्यूरो को आतंकी हमलों और राष्ट्रीय महत्व से जुड़े मामले भी सौंपे जाएंगे।
फिलहाल सिर्फ जांच : कार्मिक, लोक शिकायत निवारण, कानून एवं न्याय संबंधी मामलों की संसदीय स्थायी समिति के अध्यक्ष ईएम सुदर्शन नतचियाप्पन ने कहा, ‘सीबीआई को घटना होने के बाद जांच के लिए मामले सौंपे जाते हैं, क्योंकि उसके पास घटना पूर्व की खुफिया जानकारी जुटाने का अधिकार नहीं है’।
पुनर्गठन के बाद जासूसी भी : उनके मुताबिक, यदि सीबीआई को संभावित घटना की खुफिया जानकारी एकत्रित करने के भी अधिकार दे दिए जाएं तो वह इन्हें होने से रोकने में मदद कर सकती है। यदि घटना को रोकना ब्यूरो के बस से बाहर की बात हो तो भी वह उसकी अच्छी तरह से जांच करने की स्थिति में रहेगी, क्योंकि उसके पास आतंकी घटना के स्रोत की जानकारी होगी।
समय बचेगा : नतचियाप्पन ने कहा कि एजेंसी के पुनर्गठन के कारण मामलों को राज्य पुलिस से लेकर सीबीआई को सौंपने में होने वाली समय की बर्बादी रोकी जा सकेगी। उन्होंने कहा कि संविधान में सीबीआईआई जैसी एजेंसी के गठन के लिए संसद को केंद्रीय सूची की प्रविष्टि (8) और अनुसूची 1,2,3 के तहत अधिकार दिए गए हैं। फिलहाल सीबीआई दिल्ली स्पेशल पुलिस एक्ट 1946 के अंतर्गत आती है।
1300 रिक्त पद : कांग्रेस सांसद ने कहा कि सीबीआई को उसे सौंपे गए सभी काम चार हजार अधिकारियों के छोटे से स्टाफ के सहारे पूरे करने होते हैं। इसमें से भी 1300 पद रिक्त पड़े हैं। उन्होंने राज्यों से आईपीएस अफसरों को सीबीआई में प्रतिनियुक्ति पर भेजे जाने की प्रवृत्ति पर भी चिंता जताई, क्योंकि अपना कार्यकाल समाप्त होने पर ये अधिकारी जांच के प्रति उत्तरदायी नहीं रहते।