Manoranjan
Cinema
Interviews Interviews भले ही आमिर खान लाखों लोगों के लिए एक आइकॉन की तरह हों, लेकिन खुद आमिर मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंडुलकर और नारायणमूर्ति से काफी प्रभावित हैं। जीवन के बारे
में उनका नजरिया क्या है, आइए उन्हीं से जानते हैं..।
* आपके लाखों प्रशंसक हैं लेकिन आप खुद किनसे प्रभावित हैं?
मैं कई लोगों से प्रभावित हूं। ऐसा कोई भी आम इंसान जो साहसी, मजबूत और उच्च नैतिक मानदंडों वाला हो और जो अपने काम को पूरी ईमानदारी से अंजाम देने में भरोसा रखता हो, मेरा आइकॉन हो सकता है। हालांकि जानी-पहचानी शख्सियतों में सचिन तेंडुलकर तथा नारायणमूर्ति ने मुझे काफी प्रभावित किया है।
* कहा जाता है कि ‘चाइल्ड इज द फादर ऑफ मैन।’ क्या आपने भी अपने बच्चों से कुछ सीखा है?
मैंने अपने बच्चों से काफी कुछ सीखा है (हंसते हैं)। निश्चित तौर पर धैर्य रखना उनमें से एक है। मैं सारी बातें तो नहीं बता सकता, लेकिन ऐसी कई छोटी-छोटी बातें हैं।
* क्या आप ‘तारे जमीं पर’ के बाद बेहतर पिता बन गए हैं?
मेरा अपने बच्चों जुनैद और आरा से हमेशा ही गहरा जुड़ाव रहा है। इसके बावजूद ‘तारे जमीं पर’ के बाद मैं उन्हें दूसरे नजरिए से देखने लगा हूं। अब मैं कह सकता हूं कि उनकी जरूरतों और भावनाओं के प्रति ज्यादा संवेदनशील हो गया हूं। मुझे लगता है कि बच्चों में यही सबसे बड़ी खासियत है कि वे आपको इस आधार पर जज नहीं करते कि आपने जीवन में क्या हासिल किया है या आप कितने प्रसिद्ध हैं। यदि आप उन्हें पसंद करते हैं तो वे भी आपको पसंद करेंगे। उनमें इस बात की गहरी समझ होती है।
* क्या कुछ अलग करने का दबाव रहता है?
ईमानदारी से कहूं तो मेरे ऊपर लोगों को खुश करने का दबाव कभी नहीं होता। यहां तक कि मैंने जो फिल्में की हैं, उनमें भी कुछ अलग तरीके से पेश करने की कोशिश नहीं रही। मैंने हमेशा अपने जजमेंट को प्राथमिकता दी और उसी के मुताबिक फिल्में बनाईं या अभिनय किया। मसलन कई लोगों ने मेरे ब्लॉग पर मेरी यह कहते हुए आलोचना की कि ‘आप ‘रंग दे बसंती’ जैसी फिल्म करने के बाद ‘फना’ कैसे कर सकते हैं!’ लेकिन सच यही है कि मुझे ‘फना’ में काम करके काफी मजा आया। इसे दर्शकों ने काफी पसंद किया जबकि कई जगह तो ‘फना’ का बिजनेस ‘रंग दे बसंती’ से भी अच्छा रहा। मैं सभी वर्ग के दर्शकों तक पहुंचना चाहता हूं।