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कलेजे का टुकड़ा जिंदा तो रहे

इंदौर. वाहन दुर्घटना में जवान बेटे की मौत ने उन्हें अंदर तक तोड़ दिया लेकिन धैर्य नहीं खोया। कलेजे के टुकड़े को किसी भी रूप में जिंदा रखने की ख्वाहिश जागी और मां ने ही उसकी आंखें व किडनी दान करने की बात कह दी। हालांकि एमवायएच में सुविधा नहीं होने के कारण किडनी नहीं निकाली जा सकी।

प्रतापनगर देवास निवासी 22 वर्षीय प्रांजल कुमार शनिवार शाम बाइक (एमपी 41-बी-5799) से बहन गुंजन के साथ भंडारी हॉस्पिटल, इंदौर में भर्ती पिता के लिए खाना लेकर निकला था। मांगलिया के बाद ट्रैफिक ज्यादा होने के कारण वह धीरे-धीरे एक गाड़ी के पीछे चल रहा था। इस बीच बेताला शोरूम के करीब ट्रक (एमपी 07-जी-1023) ने पीछे से टक्कर मार दी।

गुंजन उछलकर ट्रक के नीचे चली गई और प्रांजल पहिये में आ गया। तत्काल उसे भंडारी हॉस्पिटल लाए, जहां डॉक्टर्स ने मृत घोषित कर दिया। इस वज्रपात के बाद भी मां प्रतिभा ने हिम्मत दिखाई और बोली मेरा बच्चा जिंदा रहना चाहिए। उन्होंने बेटे की आंख और किडनी दान करने के लिए प्रोत्साहित किया। शाम साढ़े सात बजे एमवायएच में डॉ. तुलिका एवं साथियों ने उसकी आंखें निकाली लेकिन सुविधा नहीं होने के कारण किडनी नहीं निकाली जा सकी।

आज था आखिरी पेपर
प्रांजल स्वामी विवेकानंद इंजीनियरिंग कॉलेज में बीई कम्प्यूटर साइंस अंतिम वर्ष का छात्र था और 24 दिसंबर को आखिरी पेपर था। हमेशा टॉपर रहे प्रांजल के मन में इंजीनियर बनने की खुशी थी लेकिन नियती को कुछ और ही मंजूर था।

और ट्रक ऊपर से गुजर गया- गुंजन ने बताया ट्रक की टक्कर लगते ही वह उछलकर गिरी। इसी बीच ऊपर ट्रक दिखा तो हाथ-पैर सिकोड़ लिए। ट्रक ऊपर से निकल गया। केवल पैर में ही चोट आई।

पांच दिन से भर्ती हैं पिता - प्रांजल के पिता सुखीचंद कुमार बैंक नोट प्रेस, देवास में अधिकारी हैं। फेफड़े में पानी भरने व लीवर बड़ा हो जाने के कारण वे 19 दिसंबर से भंडारी हॉस्पिटल में भर्ती हैं। सबसे बड़ी गुंजन एम्स, दिल्ली में लैब टेक्निशियन हैं और छोटा सौरभ 15-16 का ही है।

छह महीने पहले वहीं हुई थी दुर्घटना- गुंजन बताती है छह महीने पहले वह छोटे भाई सौरभ के साथ उसी बाइक से इंदौर जा रही थी। तब भी तौलकांटे के पास ही एक्सीडेंट हुआ था और गंभीर चोट आई थी। उसके कारण पैर में आज तक क्रैप बैंडेज बंधा है।

पिता नहीं दे पाए अंतिम विदाई- पिता सुखीचंद बेटे के अंतिम संस्कार में शामिल नहीं हो पाए। रात को हॉस्पिटल में ही उसका चेहरा देखने के बाद उन्हें सीने में दर्द होने लगा था। हार्ट अटैक पहले भी आ चुका है इसलिए परिजन ने उन्हें दूर ही रखा।

एक-दो दिन में करेंगे उपयोग- एमवायएच की नेत्र विशेषज्ञ डॉ. उल्का श्रीवास्तव ने बताया प्रांजल की आंखें एक-दो दिन में किसी दृष्टिहीन को लगा दी जाएंगी।





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