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शो-पीस नहीं सांताक्लाज!

इंदौर. santa बच्चों में खासे लोकप्रिय सांताक्लाज के बिना क्रिसमस की कल्पना नहीं की जा सकती लेकिन विभिन्न प्रतिष्ठानों में उनके व्यावसायिक इस्तेमाल से ईसाई समाज के लोगों में नाराजगी है। उनका कहना है खिलौनों के रूप में तो सांताक्लाज ठीक थे पर सालभर गार्डनों और मॉल्स में इनका वेश रखना या शो-पीस के रूप में रखना सांताक्लाज की गरिमा के विपरीत है। कुछ वर्षो से सांताक्लाज का व्यावसायिक इस्तेमाल बढ़ता जा रहा है। ईसाई समाज जनजागरण अभियान चलाकर बताएगा कि सांताक्लाज एक संत थे।

भोपाल डायोसिस के बिशप एल. मेढ़ा ने बताया सांताक्लाज का वास्तविक नाम संत क्लेमेंट था और वे एक फादर थे, जो हमेशा गरीब बच्चों और असहाय लोगों की मदद करते थे। नारबट साइमन ने कहा सांताक्लाज की लोकप्रियता दिनोदिन बढ़ती जा रही है। बच्चों के खिलौनों तक तो ठीक था लेकिन अब तो शापिंग मॉल, बाजारों में उन्हें रुपए कमाने का साधन बना लिया गया है।

फादर साइमन राज का कहना है सांताक्लाज शांति का संदेश देते थे और सालभर उपहार जुटाकर क्रिसमस पर बच्चों को बांट देते थे। इतना ही नहीं वे जरूरत की कई चीजें भी लोगों को उपहार में देते थे। उन्हें हम संत मानते हैं जिनका व्यावसायिक इस्तेमाल नहीं होना चाहिए।

भोपाल डायोसिस के कार्यकारिणी सदस्य सुधांशु पॉल ने कहा अब तो बड़े रेस्टोरेंट्स में बच्चों के मनोरंजन और लोगों की अगवानी के लिए सांताक्लाज की वेशभूषा में कलाकार खड़े हो जाते हैं। इस तरह उनका अपमान बंद होना चाहिए। मेगडिलीन डेविड ने बताया संत क्लेमेंट हमारे लिए ईश्वर का रूप हैं, वे खुशी देते हैं। उनको बेचना ईश्वर को बेचना है।

अहमदाबाद से क्रिसमस मनाने अपनी मां के घर आईं अल्बीना बेंजामिन ने बताया संत सांताक्लाज को बचपन में प्यार नहीं मिला था। वे अचानक गिफ्ट देकर खुशी देते थे। सेना में कार्यरत बैंजामिन मैन्युअल भी कहते हैं शादी की पार्टी और रेस्टोरेंट में जब वे सांताक्लाज को देखते हैं तो बुरा लगता है।

रूसीना कुमरावत का कहना है उन्हें बेचना बहुत बड़ी भूल है। गुजराती कॉलेज की साफिया नेतावत और क्रिश्चियन कॉलेज की छात्रा रोज मेरी रमेश मैथ्यू ने कहा सांताक्लाज का तो सालभर इंतजार रहता है, उनके अचानक आकर उपहार देने से सबसे बड़ी खुशी मिलती है। अब बाजारों में सालभर मिलने से यह खुशी ही खत्म होती जा रही है।

दिव्या पारे और श्रुति ने कहा सांताक्लाज तो उपहार देते हैं। जब दुकानों पर हमें ग्राहक की तरह बुलाते हैं जहां बिल थमा दिया जाता है तो सांताक्लाज का अर्थ ही बदल जाता है।

बाइक पर निकले सांता
क्रिसमस के लिए विद्युत रोशनी से सजे कैथोलिक और प्रोटेंस्टेंट चर्चो में प्रभु यीशु के जन्मोत्सव का उत्साह छाया हुआ है। लोगों ने नए कपड़ों और पकवानों के साथ क्रिसमस-ट्री और झांकियां सजाई हैं। घरों और चर्चो को सितारों से जगमगा दिया है। इस बीच रविवार को रेड चर्च से युवाओं ने शांति रैली निकाली।

रेड चर्च से निकली रैली में रविवार दोपहर बाइक पर 15 से ज्यादा सांताक्लाज एक साथ निकले। साथ में प्रभु यीशु के जन्म की झांकी थी और पीछे बाइक पर थे सफेद ड्रेस और लाल टोपी लगाए कैथोलिक युवा आयोग के सदस्य। इनमें युवतियां भी शामिल थीं। सभी लोग पूरे उत्साह के साथ आने-जाने वाले लोगों का अभिवादन करते चल रहे थे। इस बीच झांकी के साथ मौजूद दल भक्ति संगीत की प्रस्तुति दे रहा था।

एबी रोड होते हुए रैली मंगलसिटी, नंदानगर चर्च, पाटनीपुरा, मालवा मिल होते हुए गांधी हॉल पहुंची। यहां पर विधायक महेंद्र हार्डिया और फादर सुसोई ज्ञानप्रकाश ने करीब 150 युवाओं का माला पहना कर सम्मान किया। श्री हार्डिया ने क्रिसमस का संदेश दिया और प्रभु यीशु के शांति के रास्ते पर चलने पर जोर दिया।

इस दौरान गीत ‘नमन् नमन् बालक यीशु तुम हो शिशु राजा..’ और ‘ईश्वर के नाम पर झूमती जिंदगी..’ बहुत पसंद किया गया। अतिथियों का स्वागत के. चंदर, सिल्वेस्टर फ्रांसिस, दीपक कुटीनो, राजेश फ्रांसिस, विक्टर सोलेस ने किया। कैथोलिक युवा आयोग के अध्यक्ष फादर साइमन राज के नेतृत्व में रैली को रेड चर्च से करीब पौने दो बजे बिशप जार्ज अनाथिल ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।

रेड चर्च सहित शहर के कैथोलिक चर्चो में सोमवार रात 11 बजे से प्रभु यीशु के जन्मोत्सव की शुरुआत हो जाएगी, जिसमें क्रिसमस की विशेष प्रार्थना के साथ ही गीत-संगीत की शुरुआत होगी। देर रात केक कटेगा और मिठाइयां बांटी जाएगी। इस बीच लोग एक दूसरों को प्रभु के आगमन की खुशी में बधाई देंगे। मंगलवार सुबह भी क्रिसमस की विशेष आराधना होगी, जिसके बाद मिलन समारोह होंगे।





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