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क्या अमरनाथ को भी तोड़ दिया जाए?

भोपाल. जनता पार्टी के अध्यक्ष सुब्रमण्यम स्वामी ने राम सेतु को तोड़ने की कोशिशों का कड़ा विरोध करते हुए सवाल उठाया कि यदि इस मानव निर्मित रचना को तोड़ा जा रहा है तो क्या प्राकृतिक रूप से बने अमरनाथ धाम को भी तोड़ दिया जाए?

श्री स्वामी रविवार को रवींद्र भवन में नवलोक भारत पत्रिका द्वारा ‘राम सेतु इतिहास तथ्य और कथ्य’ विषय पर आयोजित परिचर्चा में बोल रहे थे। उनका आरोप था कि सेतु को तोड़ने के पीछे केंद्रीय मंत्री टीआर बालू की साजिश है। क्योंकि सेतु को तोड़ कर बनाई जाने वाली नहर में आने वाले जहाजों की गति यहां आने पर कम हो जाएगी। इसे बढ़ाने के लिए जिस महंगे तेल का उपयोग करना होगा, उसकी निर्माता कंपनी के श्री बालू ही डायरेक्टर हैं।

उनका कहना था कि सेतु के लिए समुद्र की रेत भी साफ करनी होगी। इस के लिए जिस कंपनी से बात हो रही है, उसका मालिक श्री बालू का बेटा ही है। उन्होंने सोनिया गांधी और एम करुणानिधि को हिंदू विरोधी निरूपित किया। श्री स्वामी ने कनाडा के सुनामी विशेषज्ञ श्री मूर्ति का हवाला देते हुए कहा कि राम सेतु सुनामी से रक्षा के लिए कवच है। यदि यह टूटा तो केरल और तमिलनाडु को सुनामी बरबाद कर देगी।

अध्यक्षता माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय के कुलपति अच्युतानंद मिश्र ने की। इस मौके पर नवलोक भारत के संस्थापक संपादक कैलाश सारंग, वरिष्ठ पत्रकार रमेश शर्मा, रामसेतु रक्षा आंदोलन के प्रदेश संयोजक राजेश तिवारी भी उपस्थित थे। स्वागत भाषण पत्रिका के प्रबंध संपादक विश्वास सारंग ने किया।

स्वामी बोले, गुजरात के नतीजे हिंदुत्व की जीत
जनता पार्टी अध्यक्ष सुब्रमण्यम स्वामी ने गुजरात चुनाव के नतीजे को हिंदुत्व की जीत बताते हुए कहा कि यह तो शुरुआत है। उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को वेटिकन की प्रतिनिधि के रूप में हिंदुओं को नीचा दिखाने के लिए तत्पर बताते हुए कहा कि सोनिया को अपने बेटा-बेटी समेत इटली जाने की तैयारी कर लेनी चाहिए।

राम सेतु रक्षा मंच की 30 दिसंबर की दिल्ली रैली की जानकारी देने आए श्री स्वामी ने कहा वे जल्द ही सुप्रीम कोर्ट में ऐसे दस्तावेज पेश करेंगे, जो केंद्र सरकार ने कोर्ट से छुपाए हैं। रविवार को प्रेस कान्फरेंस में श्री स्वामी ने बताया कि 30 दिसंबर को दिल्ली रैली में देश भर से 25 लाख लोग जुटेंगे। श्री स्वामी ने कहा कि राजीव गांधी के हत्यारे लिट्टे की समर्थक डीएमके पार्टी और उसे खुश करने के लिए यूपीए सरकार रामसेतु को तोड़ना चाहती है।

हालांकि 1860 से 2000 तक बनीं 15 समितियों में से किसी ने भी इसकी सिफारिश नहीं की थी। रामसेतु तोड़ने से लिट्टे को अपनी गतिविधियां चलाने में आसानी हो सकती है, जबकि देश को एक हजार करोड़ रुपए का आर्थिक नुकसान होगा, मछुआरे बेरोजगार होंगे।

चल रही है बात : श्री स्वामी ने एक सवाल के जवाब में कहा कि भाजपा चाहे तो जनता पार्टी उसके साथ आ सकती है। वैसे जयललिता की एआईडीएमके से जनता पार्टी की बात चल रही है।





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