भोपाल.
राज्य शिक्षा केंद्र में प्रश्नपत्रों और उत्तरपुस्तिकाओं की छपाई में करोड़ों रु.की हेराफेरी का मामला सामने आया है। पिछले साल हुई छपाई में हर जिले में लाखों रुपए पानी की तरह बहाए दिए गए। भाजपा सांसद अशोक अर्गल ने इस मामले में शिक्षा केंद्र को पत्र लिखा है।
उन्होंने भुगतान रोक कार्रवाई करने की जरूरत बताई है। इसके बाद केंद्र के स्तर पर हर जिले में हुए खर्चे की छानबीन के साथ ही इस सत्र की परीक्षाओं के लिए फूंक-फूंक कर कदम उठाए जा रहे हैं।
यह मामला वर्ष 2006-07 का है। सभी जिलों में पहली से आठवीं कक्षा की परीक्षाओं के लिए प्रश्नपत्र और उत्तरपुस्तिकाएं तैयार कराई गई थीं। केंद्र ने तो दो और तीन रुपए प्रति छात्र इनकी दरें तय कर दी थीं,पर अधिकांश जिलों ने कई गुना ज्यादा कीमतों पर यह काम कराया। इन जिलों में यह काम शासकीय मुद्रणालय को दे दिया गया। शासकीय मुद्रणालय ने कुछ निजी प्रकाशन संस्थानों को यह काम सौंपा।
जब शासकीय मुद्रणालय से सत्यापित निजी प्रकाशन संस्थानों के भारीभरकम बिल जिलों में मिले तो अधिकारियों के कान खड़े हो गए, क्योंकि बिल निर्धारित दरों के हिसाब से काफी ज्यादा होने से मामला उनके बजट के बाहर हो गया। कई जिला अधिकारियों ने इस पर राज्य शिक्षा केंद्र की राय ली और भुगतान के लिए अतिरिक्त राशि की मांग कर डाली।
>> मैंने शिक्षा कें्रद का ध्यान इस ओर आकृष्ट किया था। लेकिन कोई सकारात्मक कार्रवाई हुई नहीं है। पूरे मामले की जांच होनी चाहिए और सारे भुगतान रोके जाने चाहिए, सुना है भुगतान हो रहे हैं।
अशोक अर्गल, सांसद, मुरैना
>> पहली कोशिश भविष्य में व्यवस्था को ठीक करने की है। हमने इसी महीने परीक्षाओं के संबंध में स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए हैं। पिछली गड़बड़ियों के बारे में पूरी पड़ताल के बाद ही कुछ कहना उचित होगा।
आरसी जुलानिया, कमिश्नर, राज्य शिक्षा केंद्र