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टैंशन में हैं 68 फीसदी भारतीय सीईओ

नई दिल्ली. दुनियाभर में भले ही भारतीय कंपनियों की धूम मची है लेकिन बात काम के दबाव की हो तो दो-तिहाई भारतीय एग्जीक्यूटिव्स के पसीने छूट जाते हैं। टैंशन में हैं 68 फीसदी भारतीय सीईओएसोचैम के एक सर्वेक्षण में पाया गया है कि केवल 32 फीसदी मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) ही तनाव के बिना बेफिक्र होकर काम कर पाते हैं जबकि बाकी 68 फीसदी सीईओ तनाव में काम करते हैं। समय की कमी के चलते वे अपने लिए समय नहीं निकाल पाते।

एसोचैम द्वारा किए गए सर्वेक्षण ‘सीईओ वेज टू मैनेज स्ट्रेस’ में कुल 400 सीईओ की राय ली गई। इनमें से 128 सीईओ ने कहा कि वे योग, व्यायाम, गोल्फ और साइकिलिंग जैसे खेलों, संगीत और सुबह टहलने के जरिए तनाव को दूर कर लेते हैं। बाकी सीईओ का कहना है कि उनके पास काम इतना अधिक है कि वे योग और कसरत के लिए समय ही नहीं निकाल पाते। इस सर्वेक्षण में सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के सीईओ की राय ली गई।

एसोचैम के अध्यक्ष वेणुगोपाल धूत ने कहा कि 50 से 65 वर्ष के सीईओ अपने स्वास्थ्य की देखभाल के साथ ही संगठन की अपेक्षाओं पर खरे उतरते हैं। इनमें से ज्यादातर सुबह योग करते हैं। इस उम्र वर्ग के सीईओ तनाव से उबरने के लिए गोल्फ खेलना, करीब के हिल स्टेशन और सफारी पार्क में जाना पसंद करते हैं। 30 से 45 उम्र वर्ग के सीईओ 50 से 65 वर्ष के मुकाबले सेहत को लेकर ज्यादा सचेत हैं। नई उम्र के सीईओ जिम जाना अधिक पसंद करते हैं। जिम जाने से उन्हें दबाव का सामना करने में मदद मिलती है।

सीईओ शिमला, मनाली, नैनीताल जाना पसंद करते हैं
सर्वेक्षण में करीब 52 प्रतिशत युवा सीईओ शामिल हुए। सर्वे में 68 फीसदी से अधिक सीईओ ने कहा कि महत्वाकांक्षी लक्ष्यों को हासिल करने के लिए उन पर काफी दबाव बढ़ा है। तनाव बढ़ने की दशा में युवा सीईओ फिजीशियन और डाक्टर की सलाह लेने से परहेज करते हैं और हाई ब्लड प्रैशर जैसी परेशानियों के सामने आने पर ही डाक्टर के पास जाते हैं।

नई पीढ़ी तनाव दूर करने के लिए परिवार और मित्रों के साथ वीकएंड में फिल्म देखना, संगीत सुनना और ड्राइविंग का सहारा लेना पसंद करती है। सीईओ अब कम अवधि की छुट्टियों बिताने के लिए नैनीताल, मसूरी, शिमला, मनाली जैसे हिल स्टेशनों पर जाना पसंद करते हैं जबकि जयपुर और उदयपुर जैसे स्थानों पर वर्ष में एक बार ही जाते हैं। करीब 40 प्रतिशत सीईओ अब नेचुरोपैथी, मसाज और एक्युप्रेशर जैसे आयुर्वेदिक उपचार का रुख कर रहे हैं।





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