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Shekhawati Shekhawati सीकर.
जमीन पर लेटी ललिता को लेबर रूम में शिफ्ट करने की जद्दोजहद जारी थी और इधर परिजनों के जेहन में सिर्फ सकुशल डिलेवरी की चिंता।
अस्पताल में अव्यवस्थाओं के आलम से घबराए परिजनों के लिए बैड का मामला अब प्राथमिकता में नहीं रहा था, क्योंकि इसके लिए रातभर मशक्कत कर चुके थे। योजनाओं और आंकड़ों का हवाला देकर जननी को सुरक्षित रखने के अस्पताल प्रशासन के दावों की हकीकत कुछ ये है। एसके अस्पताल के मातृ शिशु कल्याण केंद्र में जननी सुरक्षा योजना बेमानी साबित हो रही है।
एकाएक डिलेवरी के लिए आने वाली महिलाओं की संख्या में इजाफा होने के बाद स्वास्थ्य विभाग देखरेख के मामले में खुद असहाय हो गया है। अव्यवस्थाओं की बानगी देखिए महिलाएं प्रसव पीड़ा झेलते हुए जमीन पर सोने को मजबूर हैं। यह स्थिति ललिता की ही नहीं, बल्कि आजकल यहां डिलेवरी के लिए आने वाली सभी महिलाओं और उनके परिजनों को कुछ इसी तरह बिस्तर का इंतजार करना होता है।
1 वार्ड, 1 दिन और 20 डिलेवरी
एसके अस्पताल के मातृ शिशु कल्याण केन्द्र में फिलवक्त एक वार्ड का बंदोबस्त किया हुआ है। औसत हर दिन यहां करीब 20 से 25 की संख्या में महिलाएं भर्ती हो रही हैं। डिलेवरी के बाद उन्हें 48 घंटे तक सरकार की ओर से अस्पताल में ही रखने के निर्देश हैं। ऐसे में वार्ड में यह संख्या दुगुनी हो जाती है और परिजनों के साथ रहने से दिक्कत और खड़ी हो जाती है। हालांकि बरामदे में व्यवस्था की जाती है, मगर बिस्तर का बंदोबस्त नहीं हो पाता है। पिछले कई महीनों से यहां स्टोर को खाली कराने के लिए पीएमओ ने आदेश दे दिए, मगर अभी खाली नहीं हो पा रहा है।
स्टाफ भी परेशान
मातृ शिशु कल्याण केंद्र में तैनात स्टाफ भी बेहद दबाव में रहता है। लगातार डिलेवरी के लिए महिलाओं की संख्या बढ़ने से उन्हें डील करने में खासी परेशानी होती है। फिलहाल नए आदेश के तहत 48 घंटे अस्पताल में डिलेवरी के बाद रखने की बात बेहद परेशानी वाली साबित हो रही है।
- हर वक्त दो नर्सिग स्टाफ मौजूद होना चाहिए, अक्सर एक ही नर्स जूझती रहती है।
- बैड की संख्या मात्र 20 से 25 ही हैं। ऐसे में खासी परेशानी खड़ी हो जाती है।
- स्टाफ की कमी होने से व्यवस्थाएं प्रोपर नहीं बन पा रही हैं।
स्टोर खाली कराया जाएगा : पीएमओ
एसके अस्पताल के प्रमुख चिकित्सा चिकित्सा अधिकारी डा. एसएस चौहान कहते हैं कि जननी सुरक्षा योजना की वजह से सभी सरकारी अस्पतालों में प्रसव के लिए आने वाली महिलाओं की संख्या बढ़ रही है। अस्पताल में बैड की समस्या आ रही है। इसके लिए मातृ शिशु कल्याण केंद्र के स्टोर को खाली कराने के निर्देश पहले दिए जा चुके हैं। अब तत्काल प्रभाव से इसे वार्ड के तौर पर शिफ्ट किया जाएगा। हालांकि मुख्य अस्पताल में भी व्यवस्था है, मगर परिजन वहां लेकर नहीं जाते हैं।